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आंदोलन की कीमत मरीज क्यों चुकाए?

Why should patients pay the price for the agitation?

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज और पीबीएम अस्पताल को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद अब केवल प्रशासनिक या संस्थागत मुद्दा नहीं रह गया है। इसका सबसे बड़ा और सबसे दुखद असर उन मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है, जो जीवन बचाने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। दुर्भाग्य यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में वही वर्ग सबसे अधिक पीड़ित है, जिसकी चिंता सबसे पहले होनी चाहिए।

मेडिकल कॉलेज और पीबीएम अस्पताल जैसे संस्थान केवल भवन या कार्यालय नहीं हैं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन से जुड़े हुए हैं। यहां प्रतिदिन दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे संभाग से मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल का माहौल आंदोलन, धरना, प्रदर्शन और प्रशासनिक खींचतान से प्रभावित होता है, तो सबसे पहले चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होती हैं। इसका सीधा असर मरीजों की जांच, उपचार, ऑपरेशन और अन्य आवश्यक सेवाओं पर पड़ता है।

विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को

लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है। यदि किसी पक्ष को प्रशासनिक निर्णयों पर आपत्ति है या किसी प्रकार का अन्याय महसूस होता है तो उसका समाधान भी लोकतांत्रिक तरीके से ही होना चाहिए। लेकिन जब विरोध का स्वरूप ऐसा हो जाए कि आम जनता की मूलभूत सेवाएं प्रभावित होने लगें, तब उस आंदोलन की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रशासन सक्रियता नहीं दिखा पा रहा

वर्तमान स्थिति में ऐसा प्रतीत होता है कि आंदोलन करने वाले अपने उद्देश्य पर अडिग हैं और डॉक्टर भी अपनी-अपनी स्थिति पर कायम हैं। दूसरी ओर प्रशासन भी समाधान निकालने में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहा। परिणामस्वरूप मरीज और उनके परिजन असमंजस, परेशानी और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इलाज में देरी कई बार किसी मरीज के लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन जाती है।

विवादों का समय रहते समाधान निकालें

यह भी ध्यान रखना होगा कि चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी जिम्मेदारी है। वहीं प्रशासन का दायित्व है कि वह संवाद स्थापित कर विवादों का समय रहते समाधान निकाले। टकराव जितना लंबा चलेगा, उसका नुकसान जनता को ही उठाना पड़ेगा।

समाधान बातचीत की मेज पर

ऐसे मामलों का सबसे बेहतर समाधान बातचीत की मेज पर ही निकल सकता है। यदि सभी पक्ष अपने-अपने आग्रह से थोड़ा ऊपर उठकर मरीजों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, तो समाधान असंभव नहीं है। धरने, घेराव और आरोप-प्रत्यारोप किसी भी पक्ष की ताकत दिखा सकते हैं, लेकिन वे मरीजों को राहत नहीं दे सकते।

पीबीएम स्वास्थ्य व्यवस्था की धुरी

बीकानेर का पीबीएम अस्पताल पूरे संभाग की स्वास्थ्य व्यवस्था की धुरी है। इसकी कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार का व्यवधान लाखों लोगों के विश्वास को प्रभावित करता है। इसलिए आवश्यक है कि सरकार, मेडिकल कॉलेज प्रशासन, चिकित्सक और आंदोलनरत पक्ष सभी तत्काल सकारात्मक पहल करें। किसी भी विवाद का अंत संवाद से ही होता है, संघर्ष से नहीं।

सभी पक्ष आत्ममंथन करें

अंततः यह नहीं भूलना चाहिए कि अस्पताल राजनीति या शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने का केंद्र है। यदि किसी आंदोलन की सबसे बड़ी कीमत मरीज चुका रहा है, तो समय आ गया है कि सभी पक्ष आत्ममंथन करें और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस विवाद का शीघ्र समाधान निकालें। यही लोकतंत्र की भावना है और यही समाज के प्रति हमारी वास्तविक जिम्मेदारी भी।

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