NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। श्री लालेश्वर महादेव मंदिर के अधिष्ठाता स्वामी विमर्शानंदगिरि गिरी महाराज ने कहा कि जितनी भी समस्याएं हैं, चाहे शिष्य की हैं, चाहे व्यक्ति की हैं, चाहे परिवार की हैं, चाहे राष्ट्र की है, उन सबका वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान शास्त्रों के पास उपलब्ध है। विमर्शानंदजी गुरुवार को मंदिर परिसर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव कार्यक्रम में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि गुरु एक सर्वव्यापक तत्व है और वह सर्वव्यापक शक्ति किसी भी व्यक्ति के माध्यम से, किसी भी परिस्थिति के माध्यम से, किसी के अन्दर भी प्रकट हो सकती है। विमर्शानंद जी ने बताया कि गुरु के तीन रुप होते हैं, मानव-गुरु, सिद्ध-गुरु और दिव्य-गुरु। कोई भी साधक अपनी श्रद्धा को, अपने समर्पण को और अपनी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए गुरु के तीनों रूपों को अर्थात् व्यक्त रूप, व्यक्तव्यक्त रूप और अव्यक्त रूप को समझ सकता है।
गुरु-पूर्णिमा वास्तव में है संकल्प दिवस
उन्होंने कहा कि गुरु-पूर्णिमा वास्तव में संकल्प दिवस है। गु अर्थात् अंधेरा, रु अर्थात् उजाला, अंधेरे को दूर करने वाली शक्ति। गुरु शब्द का ही अर्थ है, बड़ा, भारी। ज्ञान में भारी और दिव्य गुण में भारी। यदि हम इस पुण्य दिवस पर प्रार्थना करेंगे तो निश्चित रूप से जो सर्वव्यापक तत्व है। इससे पूर्व लालेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में ब्रह्मलीन श्री स्वामी संवित् सोमगिरी जी महाराज के पवित्र कृपामह प्रवाह के अंतर्गत श्रीगुरु-व्यास पूर्णिमा महोत्सव मंदिर अधिष्ठाता पूज्य स्वामी श्री विमर्शानंदगिरि जी गिरी जी महाराज के सानिध्य में हर्ष और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
प्रातः 7.30 बजे गुरु समाधि मंदिर में पूजन अर्चना के पश्चात प्रातः 9 बजे गुरु मंडल में पूजन अभिषेक अर्चना एवं शास्त्र पाठ हुआ। 10 बजे सामूहिक श्री गुरु-पूजन तथा पूज्यश्री स्वामी जी महाराज द्वारा 10.30 बजे प्रवचन हुआ। इस अवसर पर पूज्यश्री स्वामीजी महाराज ने गुरु-पूर्णिमा के पर्व पर सभी शिष्यों, भक्तों को बधाई दी। मानव प्रबोधन प्रन्यास के विजेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान स्वामी संवित् सोमगिरि जी महाराज द्वारा रचित संवित् साहित्य धर्म का एक अंश विज्ञान के तृतीय संस्करण का विमोचन किया गया।
सुश्री निहारिका खत्री द्वारा स्वयं बनाई गई संवित् सोमगिरि जी महाराज का छायाचित्र भी पूज्यश्री स्वामी जी महाराज को भेंट की गई। इस महोत्सव के सफल आयोजन में राजकुमार कौशिक, हरीशचंद्र शर्मा, घनश्याम स्वामी, भवानीशंकर व्यास, बजरंगलाल शर्मा, रमेश शर्मा, रामदयाल राजपुरोहित, सुरेश गुप्ता, अर्जुननाथ सिद्ध, विजय सिंह राठौड़, साकेत शर्मा, रमेश जोशी, श्यामसुंदर तिवारी, रमेश आचार्य, हरिओम पूंज, रमेश शर्मा,योगेश शर्मा, नंदू सिंह शेखावत, नंदकिशोर भाटी, प्रदीप देवड़ा, वी.के. व्यास, मोहित अग्रवाल आदि का सहायोग रहा।


