MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। दुर्घटनाओं का एक बड़ा और अक्सर अनदेखा कारण है रात्रि में वाहनों द्वारा उपयोग की जाने वाली हाई बीम लाइटें। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक जिम्मेदारी से भी जुड़ी हुई है। सड़कों पर चलने वाले वाहन चालकों की लापरवाही, विशेषकर हाई बीम का अनियंत्रित उपयोग और डिपर देने की अनिच्छा, कई निर्दोष लोगों के जीवन को संकट में डाल देती है।
रात के समय जब कोई वाहन हाई बीम पर चलता है, तो सामने से आने वाले चालक की आंखें कुछ क्षणों के लिए चौंधिया जाती हैं। यही कुछ क्षण अक्सर दुर्घटना का कारण बनते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में यह समस्या और भी गंभीर है, जहां सड़कें संकरी होती हैं और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं होती। ऐसे में हाई बीम का दुरुपयोग सीधे-सीधे जानलेवा साबित हो सकता है।
यह केवल नागरिकों की जिम्मेदारी नहीं है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, बल्कि जिला प्रशासन का भी कर्तव्य है कि वह इस समस्या को गंभीरता से ले। प्रशासन को चाहिए कि वह समय-समय पर रात्रिकालीन अभियान चलाकर हाई बीम के दुरुपयोग पर सख्ती से कार्रवाई करे। यातायात पुलिस को सक्रिय बनाते हुए चालकों को जागरूक किया जाए और नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही, जनजागरूकता अभियान भी अत्यंत आवश्यक हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक मंचों के माध्यम से लोगों को यह समझाना होगा कि एक छोटी सी लापरवाही किसी की जान ले सकती है। वाहन निर्माताओं को भी तकनीकी सुधारों के माध्यम से ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे हाई बीम का उपयोग नियंत्रित हो सके।
जमीनी स्तर पर इस समस्या को समझना जरूरी
जिला प्रशासन को एयर कंडीशंड कार्यालयों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर इस समस्या को समझना और समाधान करना होगा। मानव जीवन की रक्षा सर्वोपरि है, और यदि थोड़ी सी सजगता और कठोरता से दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, तो यह हर जिम्मेदार तंत्र का कर्तव्य बनता है। सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि एक सामूहिक नैतिक दायित्व है। जब तक प्रशासन और नागरिक दोनों अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक ऐसी दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना कठिन रहेगा।


