MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। शांत, सौहार्दपूर्ण और गंगा-जमुनी संस्कृति के लिए पहचान रखने वाला बीकानेर इन दिनों कुछ स्थानीय मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। बिजली आपूर्ति और प्रबंधन से जुड़े प्रश्न हों, पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर उठती आवाजें हों अथवा वर्षों से जनजीवन को प्रभावित करते रहे रेल फाटकों का विषय हो, इन सभी मुद्दों पर नागरिक खुलकर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में कोई भी व्यक्ति किसी भी समय और किसी भी स्थान से अपनी बात लाखों लोगों तक पहुंचा सकता है। यह लोकतंत्र की एक सकारात्मक उपलब्धि है, किंतु इसके साथ एक चुनौती भी जुड़ी हुई है।
मानव स्वभाव है कि वह जिन बातों को बार-बार सुनता और देखता है, उन्हें सत्य मानने लगता है। ऐसे में यदि किसी समस्या को लेकर लगातार नकारात्मक टिप्पणियां, आरोप-प्रत्यारोप अथवा आक्रोशपूर्ण प्रतिक्रियाएं सामने आती रहें तो जनमानस में असंतोष का वातावरण बनना स्वाभाविक है। कई बार वास्तविक समस्या से अधिक उसकी प्रस्तुति और प्रचार लोगों की धारणा को प्रभावित करने लगते हैं। इसलिए आवश्यक है कि समस्याओं को केवल सोशल मीडिया की बहस तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके समाधान की दिशा में ठोस प्रयास भी किए जाएं।
शहर की पहचान इमारतों, सड़कों से नहीं
यहां जिला प्रशासन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी भी शहर की पहचान केवल उसकी इमारतों, सड़कों और संस्थानों से नहीं होती, बल्कि वहां की प्रशासनिक संवेदनशीलता और समस्याओं के प्रति तत्परता से भी होती है। जब विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दे एक साथ चर्चा में हों, तब उनके समाधान के लिए विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर समन्वित प्रयास आवश्यक हो जाते हैं।
कार्ययोजना भी तैयार की जानी चाहिए
ऐसे समय में जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त, बीडीए आयुक्त, नगर निगम आयुक्त पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त बैठक एक सकारात्मक पहल साबित हो सकती है। इस प्रकार की बैठक में केवल समस्याओं की समीक्षा ही नहीं, बल्कि उनके समाधान की समयबद्ध कार्ययोजना भी तैयार की जानी चाहिए। बिजली आपूर्ति में सुधार, अस्पताल व्यवस्थाओं की निगरानी, यातायात और रेल फाटकों से जुड़ी परेशानियों के स्थायी समाधान जैसे विषयों पर साझा रणनीति बनाई जा सकती है।
संवाद की प्रक्रिया भी मजबूत करनी होगी
साथ ही प्रशासन को जनसंपर्क और संवाद की प्रक्रिया भी मजबूत करनी होगी। यदि जनता को यह महसूस हो कि उनकी शिकायतें सुनी जा रही हैं और उन पर कार्रवाई हो रही है, तो अनावश्यक भ्रम और असंतोष स्वतः कम हो जाएंगे। पारदर्शिता और जवाबदेही ही विश्वास निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।बीकानेर की पहचान सदैव भाईचारे, सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना से रही है। यह शहर चुनौतियों से घबराने वाला नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से उनका समाधान खोजने वाला शहर है।
साझा मंच पर आएं
आवश्यकता केवल इस बात की है कि जनभावनाओं को समझते हुए प्रशासन, जनप्रतिनिधि और नागरिक समाज एक साझा मंच पर आएं। संवाद को विवाद पर और समाधान को आरोपों पर प्राथमिकता दी जाए। तभी बीकानेर अपनी गौरवशाली गंगा-जमुनी संस्कृति को न केवल बनाए रख सकेगा, बल्कि उसे और अधिक सशक्त रूप में स्थापित भी कर पाएगा।


