MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर के लोगों को 18 साल के बाद एक नया चिड़ियाघर मिलेगा। वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि चालू वर्ष में बीछवाल में बन रहा नया चिड़ियाघर जिसका नया नाम होगा (मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क) आम जनता के लिये खोल दिया जाएगा। बीकानेर शहर में पब्लिक पार्क में बना चिड़ियाघर वर्ष 2008 में बंद कर दिया गया था। बीकानेर के पत्रकार नीरज जोशी व महेन्द्र सिंह शेखावत ने नए पार्क का अवलोकन किया।
पार्क में ब्लैक बग, चीतल व नील गाय आराम से अपने अपने पिंजरों में चहलकदमी कर रहे थे। पार्क में वर्तमान में 125 शाकाहारी जानवर जिनमें ब्लैक बग, चिंकारा, चीतल तथा नील गाय शिफट किए जा चुके हैं। जल्द ही मांसाहारी जानवर शेर, चीता, भेडि़या, लक्कड़बग्गा, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, रेगिस्तानी बिल्ली आदि लाए जाएंगे। वाइल्ड लाइफ डीएफओ संदीप छलाणी के अनुसार बायोलॉजिकल पार्क को आरंभ करने के लिये केन्द्रीय चिडि़याघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
प्राधिकरण की ओर से अंतिम निरीक्षण किए जाने के बाद मांसाहारी जीव पार्क में रखने की अनुमति मिलने के बाद पार्क को आम जनता के लिये खोल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्क में लगभग सभी मांसाहारी व शाकाहारी जीवों के बड़े बड़े पिंजरे बना दिये गए हैं। कुल 30 पिंजरे बनाए जाने हैं इनमें से 14 पिंजरे बना दिये गए हैं। पार्क कुल 58 करोड रुपये की लागत से तैयार होगा अब तक लगभग आधी रकम खर्च की जा चुकी है। शेष काम जारी हैं।
वर्ष 2015 में मंजूर हुआ था बायोलॉजिकल पार्क प्रोजेक्ट

बीकानेर में बायोलॉजिकल पार्क का प्रोजेक्ट वर्ष 2015 में मंजूर हुआ था। समय पर बजट नहीं मिलने से इस कार्य में देरी होती गई। अब भी आधे से अधिक बजट खर्च किया जाना बाकी है। कई निर्माण कार्य कराये जा चुके हैं। कई कराये जा रहे हैं। पार्क तैयार होते ही बच्चों के मनोरंजन के लिये बीकानेर में सबसे अधिक आकर्षक स्थान होगा। 50 हेक्टेयर में बने बायोलॉजिकल गार्डन से बीकानेर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है।
यह गार्डन न केवल वन्यजीव संरक्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि शहरवासियों के लिए सुकून, शांति और प्राकृतिक वातावरण का अनूठा अनुभव भी प्रदान करेगा। गार्डन में मांसाहारी और शाकाहारी जानवरों के लिए अलग-अलग विशाल और खुले बाड़े बनाए गए हैं। इन बाड़ों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि जानवरों को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव हो और उन्हें कैद जैसा महसूस न हो।
वन्यजीवों के लिए विस्तृत क्षेत्र

प्रत्येक बाड़े में पेयजल के लिए प्राकृतिक स्वरूप वाले जल स्रोत, हरियाली के लिए घना वन जैसा माहौल, छाया के लिए बड़े-बड़े पेड़, तथा खोह और मांद जैसी संरचनाएं विकसित की गई हैं। बायोलॉजिकल गार्डन में बाघ, शेर, चीता और भेड़िया जैसे मांसाहारी जीवों के लिए बड़े और सुरक्षित बाड़े तैयार किए गए हैं। वहीं हिरन, लोमड़ी, गीदड़, लकड़बग्घा और जंगली बिल्ली सहित कई शाकाहारी और अन्य वन्यजीवों के लिए भी विस्तृत क्षेत्र विकसित किया गया है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को विविध वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
निजी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक

पार्क के भीतर आने-जाने के लिए ब्लॉक रोड का निर्माण किया गया है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यहां निजी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। आगंतुकों को अपने वाहन मुख्य द्वार पर ही पार्क करने होंगे, जहां से उन्हें इलेक्ट्रिक रिक्शों के माध्यम से गार्डन के अंदर ले जाया जाएगा। इससे प्रदूषण कम होगा और प्राकृतिक वातावरण संरक्षित रहेगा। मुख्य द्वार के बाहर ही कैंटीन और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। गार्डन के प्रवेश द्वार को भी आकर्षक रूप दिया गया है। यहां एक गुमटी बनाई गई है, जिसमें हिरन की मूर्ति स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही पास में गिद्ध की एक विशाल आकृति स्थापित की गई है, जिसे बच्चों के मनोरंजन के लिए फिसलपट्टी के रूप में भी उपयोग किया जा सकेगा।
पार्क का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण

यह विशेष आकर्षण बच्चों और परिवारों को खासा लुभाएगा। रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर वीरेंद्र कुमार के अनुसार, बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और आवश्यक विभागीय प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही इसे आमजन के लिए खोल दिया जाएगा। यह बायोलॉजिकल गार्डन बीकानेर के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान स्थापित करेगा और पर्यावरण जागरूकता के साथ-साथ मनोरंजन का प्रमुख केंद्र बनेगा।
बीकानेर में गूंजेगी शेर की दहाड़,

बीकानेर में जल्द ही शेर की दहाड़ गूंजेगी । बीछवाल स्थित मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क लगभग बनकर तैयार है और अब इसका इंतजार है सिर्फ सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया की स्वीकृति का। यह पार्क न केवल संभाग का सबसे बड़ा जैविक उद्यान होगा, बल्कि इसका स्वरूप इतना आकर्षक है कि यह पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण दोनों का केंद्र बनेगा। करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह बायोलॉजिकल पार्क बीकानेर की पहचान बनेगा। यहां 15,000 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
मिनी वाइल्डलाइफ सेंचुरी

यह पार्क बीकानेरवासियों के लिए एक मिनी वाइल्डलाइफ सेंचुरी की तरह होगा। बीकानेर का पुराना चिड़ियाघर वर्ष 2008 में बंद हो गया था। अब लगभग 18 साल बाद बीकानेर को उसका अपना पूर्ण विकसित जैविक उद्यान मिलने जा रहा है।बायोलॉजिकल पार्क बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरणीय संतुलन में मील का पत्थर साबित होगा।


