Samachar Seva

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संवेदनशील मामलों में संतुलन और जिम्मेदारी आवश्यक

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)।  राजकीय संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनता को यह अधिकार है कि वह सरकारी व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर करे और जवाबदेही सुनिश्चित करे। लेकिन इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि किसी भी घटना को बिना तथ्यों की पूर्ण जांच के अनावश्यक विवाद और सनसनी का विषय न बनाया जाए। विशेष रूप से चिकित्सा जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।

 हाल ही में प्रसूताओं में किडनी संबंधी बीमारी और उससे जुड़े मामलों को लेकर जिस प्रकार का माहौल बना, उसने समाज के एक वर्ग में चिंता पैदा की है। निश्चित रूप से किसी भी मरीज की तबीयत बिगड़ना या किसी अप्रिय घटना का घटित होना दुखद है और उसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। परंतु यह भी समझना होगा कि चिकित्सा विज्ञान अपनी तमाम उपलब्धियों और आधुनिक संसाधनों के बावजूद प्रकृति के सामने सर्वशक्तिमान नहीं है। डॉक्टर और चिकित्सा संस्थान जीवन बचाने का हरसंभव प्रयास करते हैं, लेकिन हर परिस्थिति उनके नियंत्रण में हो, यह अपेक्षा व्यावहारिक नहीं है।

गर्भावस्था और प्रसव जटिल चिकित्सकीय अवस्थाएं

गर्भावस्था और प्रसव स्वयं अत्यंत जटिल चिकित्सकीय अवस्थाएं हैं। कई बार मरीज की पूर्व स्वास्थ्य स्थिति, संक्रमण, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अथवा अन्य चिकित्सकीय कारण अचानक गंभीर रूप ले सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में केवल परिणाम को देखकर पूरी चिकित्सा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर देना उचित नहीं कहा जा सकता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञों द्वारा तथ्यों, रिपोर्टों और परिस्थितियों का गहन अध्ययन आवश्यक है।

संयमित और जिम्मेदार रवैया

इस पूरे प्रकरण में राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर का संयमित और जिम्मेदार रवैया उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने न तो किसी प्रकार की जल्दबाजी दिखाई और न ही भावनात्मक दबाव में आकर बयानबाजी की। उनकी प्राथमिकता तथ्य जुटाना, विशेषज्ञों से परामर्श लेना और वास्तविक कारणों का पता लगाना रही। किसी भी जनप्रतिनिधि से ऐसी ही परिपक्वता की अपेक्षा की जाती है। संवेदनशील मामलों में धैर्य और विवेकपूर्ण प्रतिक्रिया ही जनता का विश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम होती है।

पूरे तंत्र की निष्ठा और प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न

यह भी ध्यान रखने योग्य है कि चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी निरंतर दबाव में काम करते हैं। वे प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों की सेवा करते हैं और अनेक जिंदगियां बचाते हैं। यदि किसी घटना के कारण पूरे तंत्र की निष्ठा और प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया जाए तो इससे कार्यरत कर्मियों का मनोबल प्रभावित होता है। आलोचना आवश्यक है, लेकिन वह तथ्यों पर आधारित और सुधार की भावना से प्रेरित होनी चाहिए।

आशंकाओं को सत्य मान लेना उचित नहीं

समाज, मीडिया और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशील मामलों में संयम बरतें। किसी भी घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी हो, लेकिन जांच से पहले आरोपों और आशंकाओं को ही अंतिम सत्य मान लेना उचित नहीं है। लोकतंत्र में जवाबदेही जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक न्यायपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण भी है। चिकित्सा जैसे मानवीय क्षेत्र में यही संतुलन समाज और व्यवस्था दोनों के हित में रहेगा।