MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर के बीछवाल औद्योगिक क्षेत्र स्थित करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा मरुधरा बॉटनिकल गार्डन भी अब लगभग बनकर तैयार है। बीकानेर, जो अब तक अपने किले, हवेलियों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता रहा है, अब इको-टूरिज्म (पारिस्थितिक पर्यटन) के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। यहां बने नक्षत्र पार्क, राशि पार्क और नवग्रह पार्क जैसी अवधारणाएं भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान का अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं।
पार्क का अवलोकन करते हुए पत्रकार नीरज जोशी जाना कि औषधीय पौधों का पार्क न केवल आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि शोध और शिक्षा के नए अवसर भी प्रदान करेगा। यह गार्डन विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला साबित हो सकता है। रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर वीरेंद्र कुमार के अनुसार गार्डन का विकास प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखते हुए किया जा रहा है। भूमि की मूल संरचना से छेड़छाड़ किए बिना विशेष डिजाइनिंग के माध्यम से इसे आकर्षक रूप दिया जा रहा है।
प्राकृतिक वन के रूप में विकसित किया गया क्षेत्र

The botanical garden being developed across 32 hectares will give Bikaner a new identity.4
वहीं क्षेत्रीय वन अधिकारी संदीप कुमार छलानी ने बताया कि यह क्षेत्र प्राकृतिक वन के रूप में विकसित किया गया है, जहां हरियाली से आच्छादित वातावरण लोगों को सुकून और शांति प्रदान करेगा। फॉरेस्ट गार्ड शौफीन कोहरी के अनुसार गार्डन के विकास कार्य में लगातार मेहनत की जा रही है और उच्चाधिकारियों के निर्देशन में इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में तैयार किया जा रहा है। बीकानेर शहर से मात्र दस किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित यह बॉटनिकल गार्डन आने वाले समय में स्थानीय नागरिकों के लिए एक प्रमुख पिकनिक स्पॉट और पर्यावरणीय शिक्षा का केंद्र बनेगा।
ईको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
पत्रकार महेन्द्र सिंह शेखावत के अनुसार यह परियोजना निश्चित रूप से बीकानेर को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिये बीकानेर में इस पार्क का निर्माण किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा ये बॉटनिकल गार्डन 32 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। इस उद्यान का उद्देश्य मरुस्थलीय वनस्पतियों, दुर्लभ औषधीय पौधों और स्थानीय वृक्षों खेजड़ी, रोहिड़ा, बबूल) का संरक्षण करना है। बॉटनिकल गार्डन बीछवाल में ही बने नये चीडि़याघर मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क के पास ही स्थित है। बॉटनिकल गार्डन में खेजड़ी, रोहिड़ा, पलाश, जाल, कैर, गोरख इमली, और एलोविरा जैसी मरुस्थलीय प्रजातियों के साथ-साथ औषधीय पौधे भी लगाए जा रहे हैं।

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यहां होंगे पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य के आयोजन
इस गार्डन को जैव विविधता के संरक्षण, शिक्षा और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया जा रहा है। साथ ही यहां पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से आयोजन किए जाएंगे। मरुधरा बॉटनिकल गार्डन रमणीय स्थल होने के साथ ही राजस्थान की जलवायु वाले पेड़-पौधों की जानकारी भी देगा। पार्क में राजस्थान की जलवायु में पनपने वाले अलग-अलग प्रजाति के पौधे लगाए जा चुके हैं। साथ ही पौधों के बारे में जानकारी भी अंकित की गई है। वन विभाग गार्डन को टूरिज्म से जोड़ेगा। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोग भी वहां पहुंचकर जानकारी हासिल कर सके। गार्डन में बबूल, पलाश, खेजड़ी, अमलताश, बोरड़ी, कैर, जाल, रोहिड़ा, गोरख इमली, झरबेला, फोग, नीम, ऐलोविरा, कुमटा।
हरित परियोजनाएं नहीं, बल्कि भविष्य की सोच
इनके अलावा औषधीय पौधे कंटकारी, पीली कंटीली, अश्वगंधा। प्रायोगिक तौर पर शहतूत व अन्य पौधे भी लगाए गए हैं। बीकानेर जैसे मरुस्थलीय शहर में आकार ले रहा बोटेनिकल गार्डन केवल हरित परियोजनाएं नहीं, बल्कि भविष्य की सोच का सशक्त उदाहरण हैं। यह पहल न केवल पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करेगी, बल्कि शहर को एक नई पहचान भी देगी। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसे हरित क्षेत्रों का विकास अत्यंत आवश्यक हो जाता है, जो नागरिकों को प्रकृति के करीब ले जाएं और मानसिक शांति प्रदान करें। बोटेनिकल गार्डन बीकानेर को एक नए आयाम पर ले जाने की क्षमता रखता है।

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