MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था का मूल उद्देश्य सामान्य वर्ग के उन युवाओं को अवसर प्रदान करना था जो आर्थिक अभाव के कारण प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी जटिल शर्तों ने इस उद्देश्य को काफी हद तक प्रभावित किया है। आज स्थिति यह है कि पात्रता के नाम पर बनाई गई पेचीदा शर्तें ही जरूरतमंद युवाओं के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं।
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के लिए कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और फ्लैट से जुड़ी शर्तें इतनी कठोर और अस्पष्ट हैं कि वास्तविक गरीब परिवार भी इन मापदंडों में फिट नहीं बैठ पाते। उदाहरण के तौर पर, ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों के पास थोड़ी-बहुत कृषि भूमि तो होती है, लेकिन उससे उनकी आय इतनी नहीं होती कि वे आर्थिक रूप से सशक्त माने जाएं। इसके बावजूद वे ईडब्ल्यूएस के दायरे से बाहर कर दिए जाते हैं। इसी तरह, छोटे शहरों या कस्बों में एक मामूली आवासीय प्लॉट या पुराना मकान होना भी पात्रता में बाधा बन जाता है।
नियमावली में संशोधन की मांग उठना स्वाभाविक
ऐसे में केंद्र सरकार की नियमावली में संशोधन की मांग उठना स्वाभाविक है। यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। राजस्थान में इस दिशा में उठाई गई पहल ने इस बहस को नई ऊर्जा दी है। पूर्व जनप्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह राठौड़ द्वारा चलाई जा रही मुहिम इस बात को रेखांकित करती है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। इस मुहिम को मिल रहा जन समर्थन यह संकेत देता है कि समाज का एक बड़ा वर्ग इस समस्या से जूझ रहा है।
आरक्षण का उद्देश्य कागजी पात्रता नहीं
यह समझना जरूरी है कि आरक्षण का उद्देश्य केवल कागजी पात्रता तय करना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाना है। यदि नियम इतने जटिल हों कि योग्य व्यक्ति ही बाहर रह जाए, तो उस नीति की प्रासंगिकता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह ईडब्ल्यूएस के मानकों की पुनर्समीक्षा करे और उन्हें अधिक व्यवहारिक तथा सरल बनाए।
संशोधन में संतुलन रखा जाए
साथ ही, पारदर्शिता और समानता बनाए रखने के लिए यह भी जरूरी है कि किसी भी संशोधन में संतुलन रखा जाए, ताकि वास्तव में आर्थिक रूप से सक्षम लोग इसका दुरुपयोग न कर सकें। तकनीक और डेटा के बेहतर उपयोग से वास्तविक आय और स्थिति का आकलन किया जा सकता है, जिससे पात्रता निर्धारण अधिक सटीक हो सके।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण की सफलता इसी में है कि वह अपने लक्ष्य तक पहुंचे—यानी आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को समान अवसर प्रदान करे। यदि नियमों में आवश्यक सुधार किए जाते हैं, तो यह न केवल लाखों युवाओं के भविष्य को संवार सकता है, बल्कि सामाजिक न्याय की अवधारणा को भी मजबूती देगा।


