MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। पीबीएम अस्पताल और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान केवल इलाज के केंद्र नहीं, बल्कि जनविश्वास की वह धुरी हैं जिन पर पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था टिकी हुई है। बीकानेर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से आने वाले हजारों मरीजों के लिए यही स्थान अंतिम आशा का प्रतीक है। ऐसे में यहां कार्यरत चिकित्सकों की भूमिका केवल पेशेवर दायित्व तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी का रूप ले लेती है।
चिकित्सा जगत का एक स्पष्ट सत्य है कि जिन चिकित्सकों की दक्षता और व्यवहार के कारण उनकी गुडविल बन जाती है, उनके पास मरीजों की भीड़ स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। पीबीएम अस्पताल के कई डॉक्टर इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। वे ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और शिक्षण कार्य के बीच इस कदर व्यस्त रहते हैं कि उनके निजी जीवन का संतुलन प्रभावित होना तय है। कई बार मरीज उन्हें अस्पताल से लेकर घर तक ढूंढते हुए पहुंच जाते हैं,यह न केवल उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसे के असंतुलन को भी उजागर करता है।
निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल
दूसरी ओर, बीकानेर के कुछ निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अत्यधिक शुल्क, असंवेदनशील व्यवहार और नक चढ़ी प्रवृत्ति ने आम मरीज के मन में अविश्वास को जन्म दिया है। जब चिकित्सा सेवा व्यवसायिकता के अतिरेक में मानवीय संवेदनाओं से दूर हो जाती है, तब मरीज सरकारी संस्थानों की ओर रुख करने को विवश हो जाता है। यही कारण है कि पीबीएम अस्पताल और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों पर भार लगातार बढ़ता जा रहा है।
हालांकि, यह भी स्वीकार करना होगा कि अत्यधिक कार्यभार के चलते इन संस्थानों में अव्यवस्थाएं भी सामने आती हैं,लंबी कतारें, समय की कमी, और कभी-कभी संवाद का अभाव। लेकिन इन कमियों के बावजूद, यहां मिलने वाली विशेषज्ञता, संसाधनों की उपलब्धता और जीवन बचाने की प्रतिबद्धता इन्हें विशिष्ट बनाती है। यह वह स्थान है जहां सीमित संसाधनों में भी चिकित्सक अपनी पूरी क्षमता के साथ मरीजों को राहत देने का प्रयास करते हैं।
समस्या का समाधान प्रशंसा या आलोचना में नहीं
समस्या का समाधान केवल सरकारी संस्थानों की प्रशंसा या निजी अस्पतालों की आलोचना में नहीं, बल्कि एक संतुलित और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण में निहित है। निजी अस्पतालों को अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता और संवेदनशीलता लानी होगी, वहीं सरकार को पीबीएम जैसे संस्थानों में संसाधनों और मानवबल की वृद्धि करनी होगी ताकि चिकित्सकों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
अत: यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पीबीएम अस्पताल बीकानेर की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। यहां के चिकित्सकों का समर्पण और मरीजों का विश्वास इसे विशिष्ट बनाता है। जरूरत है इस विश्वास को बनाए रखने और उसे और मजबूत करने की, ताकि हर जरूरतमंद को समय पर और सम्मानजनक उपचार मिल सके।


