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पीबीएम की विरासत और जवाबदेही का सवाल

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। साल 1935 में तत्कालीन महाराजा महाराजा गंगा सिंह ने अपने पुत्र महाराजकुमार प्रिंस बीजेय सिंह की स्मृति में जिस अस्पताल की स्थापना की थी, उसके पीछे मूल भावना अत्यंत मानवीय थीकोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में दम न तोड़े। यही सोच आगे चलकर बीकानेर के ऐतिहासिक पीबीएम अस्पताल की पहचान बनी। वर्ष 1959 में यहाँ सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की स्थापना ने इस संस्थान को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं और समय के साथ यह उत्तर-पश्चिम राजस्थान का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र बन गया।

पीबीएम जनसेवा की एक जीवंत परंपरा

आज पीबीएम अस्पताल में सत्ताईस से अधिक विभाग कार्यरत हैं। सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से लेकर कैंसर उपचार तक, इस संस्थान ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। समाज के विभिन्न वर्गों और उद्योगपतियों ने भी इस चिकित्सा संस्थान के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। सीएम मूंधड़ा ट्रस्ट द्वारा स्थापित सौ करोड़ रुपये से अधिक लागत का मेडिसिन विंग हो, हल्दीराम परिवार द्वारा स्थापित हृदय रोग यूनिट हो या मोदी परिवार द्वारा निर्मित देश के चुनिंदा और विशिष्ट ब्लड बैंकों में शामिल ब्लड टेम्पल—ये सभी इस बात के प्रमाण हैं कि पीबीएम केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि जनसेवा की एक जीवंत परंपरा है।

कहीं न कहीं गंभीर खामियां मौजूद

लेकिन विडंबना यह है कि इतने गौरवशाली संस्थान का नाम पिछले कुछ समय से अव्यवस्थाओं, लापरवाही और मरीजों की मौत के मामलों को लेकर सुर्खियों में है। अस्पताल में व्यवस्थागत कमियों को लेकर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का आंदोलन करना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं गंभीर खामियां मौजूद हैं। यदि मरीजों और उनके परिजनों को समय पर उपचार, समुचित देखभाल और संवेदनशील व्यवहार नहीं मिल पा रहा है, तो यह केवल चिकित्सीय  विफलता नहीं बल्कि उस मूल भावना के साथ भी अन्याय है, जिसके आधार पर इस अस्पताल की स्थापना हुई थी।

मुआवजा किसी व्यक्ति के जीवन की भरपाई नहीं

मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी और नकद मुआवजा देने की मांग इसमें आश्चर्यजनक है। हालांकि मुआवजा किसी व्यक्ति के जीवन की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन ऐसी घटनाएं यह अवश्य संकेत देती हैं कि चिकित्सा संस्थानों में जवाबदेही तय करने की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होनी चाहिए। चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग सभी को यह समझना होगा कि चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवीय दायित्व है।

जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता बने

पीबीएम अस्पताल की गौरवशाली विरासत को बचाए रखना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आंदोलन और विरोध अपनी जगह उचित हो सकते हैं, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है कि समस्याओं का स्थायी समाधान निकले। सरकार, अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिसमें मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता बने। क्योंकि यदि पीबीएम जैसे संस्थान की मूल आत्मा कमजोर पड़ती है, तो यह केवल बीकानेर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी।

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