बीकानेर को राष्ट्रीय स्तर पर 48वीं रैंक, राज्य में 15वां स्थान
NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत जारी स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 के परिणामों में बीकानेर नगर निगम को राष्ट्रीय स्तर पर 48वीं और राज्य स्तर पर 15वीं रैंक प्राप्त हुई है। बीकानेर के पत्रकार नीरज जोशी के अनुसार सर्वेक्षण में यह प्रदर्शन दिखाता है कि कुछ मोर्चों पर सुधार हुआ है, लेकिन संपूर्ण स्वच्छता व्यवस्था अब भी उम्मीदों से काफी पीछे है।
सर्वेक्षण के प्रमुख आंकड़ों को देखे तो तस्वी र साफ होती है। बीकानेर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण 54 प्रतिशत तक है। स्रोत पृथक्करण 30 प्रतिशत, वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण 17 प्रतिशत ही दर्ज हुआ है। गारबेज फ्री सिटी की रेटिंग में कोई स्टारर नहीं मिला है। बीकानेर में ओपन डेपिफकेशन फ्री की स्थिति ++ आई है। यह सकारात्मरक संकेत ही है कि बीकानेर ने ओडीएफ की अपनी प्ल स प्लगस ग्रेडिंग की मान्यकता बना रखी है।
यह शहर की शौचालय और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की स्थिरता को दशार्ता है। कचरा प्रसंस्करण में 17% तक पहुँच पाना, अजमेर जैसे शहरों की तुलना में बेहतर है (अजमेर: 1%)। रैंकिंग में अन्य बड़े शहरों के मुकाबले तुलनात्मक रूप से मजबूत स्थिति — राजस्थान में 15वाँ स्थान, जो बीकानेर के लगातार प्रयासों को दशार्ता है।
अब भी है कई गंभीर चिंताएँ
बीकानेर में 54% डोर टू डोर कचरा संग्रहण दशार्ता है कि अभी भी लगभग आधे घरों से नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जा रहा है। स्रोत पृथक्करण केवल 30% पर है, जो दशार्ता है कि नागरिकों को सूखा-गीला कचरा अलग-अलग करने की आदत नहीं बनी है। गारबेज फ्री सिटी में नो स्टा-र का दर्जा यह स्पष्ट करता है कि शहर में दृश्य स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान और खुले में कचरे की रोकथाम जैसे बिंदुओं पर काफी काम बाकी है।
क्या कहती है रैंकिंग?
बीकानेर का राष्ट्रीय स्तर पर 48वां स्थान, जबकि अजमेर का 69वां, यह बताता है कि कुछ मामलों में बीकानेर आगे है। विशेष रूप से कचरा प्रसंस्करण (17%) और राज्य रैंकिंग (15) के आधार पर बीकानेर को मध्यम प्रदर्शन वाले शहरोंकी श्रेणी में रखा जा सकता है। लेकिन यह भी सच है कि यदि जीएफसी स्टार नहीं मिला है, तोशहर की स्वच्छता ह्लकागजीह्व ज्यादा और जमीनी कमप्रतीत होती है।
आगे की राह:
स्वच्छ:ता सर्वे पर गौर करने वाले डॉ. चर्न्द् प्रकाश के अनुसार बीकानेर नगर निगम को यदि अगले वर्ष की रैंकिंग में शीर्ष 25 शहरों में पहुँचना है, तो 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहणकी कवरेज सुनिश्चित करना। सूत्रबद्ध आईईसी के जरिए नागरिकों को पृथक्करण की प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित करना। वास्तविक समय निगरानीके लिए डिजिटल ट्रैकिंग और जीपीएस सिस्टम लागू करना होगा। कचरा प्रोसेसिंग यूनिट्सकी क्षमता में वृद्धि और उनके निरंतर संचालन पर निगरानी रखनी होगी।


