NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्राचीन व सनातन भारतीय ज्ञान और विचार की समृद्ध परम्परा-प्रो.दुबे, जगतगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के कुलपति आचार्य राम सेवक दुबे ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 प्राचीन और सनातन भारतीय ज्ञान और विचार की समृद्ध परम्परा के आलोक में तैयार की गयी है।
कुलपति दूबे शुक्रवार को महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आयोजित व्याख्यान शृंखला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ज्ञान, प्रज्ञा और सत्य की खोज को भारतीय विचार परम्परा और दर्शन में सदा सर्वोच्च लक्ष्य माना जाता था। कुलपति दूबे ने कहा कि भारत द्वारा 2015 में अपनाए गए सतत विकास एजेंडा के अनुसार विश्व में 2030 तक सभी के लिए समावेशीऔर समान गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अग्रसर है।
ईक्कीस्वी सदी कि पहली शिक्षा नीति
मुख्य वक्ता बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व आचार्य डॉ. कौशल किशोर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, ईक्कीस्वी सदी कि पहली शिक्षा नीति है जिसका लक्ष्य हमारे देश के विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करना है तथा भारत कि परम्परा और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार को बरकरार रखते हुए, ईक्कीस्वी सदी की शिक्षा के लिए आकांक्षात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
गुणवत्ता पूर्ण उच्चतर शिक्षा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य प्रत्येक विद्यार्थी को ज्ञान केन्द्रित भारतीय मूल्यों से विकसित गुणवत्ता पूर्ण उच्चतर शिक्षा उपलब्ध करवाना है।
उन्होने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परम्पराओं का संपोषित विकास कर संबल प्रदान करते हुए भारत केन्द्रित तथा समाज पोषित होकर भारत को परम वैभव राष्ट्र तथा जगतगुरु बनाने में महती भूमिका का निर्वहन करेगी। उन्होने विश्वास जताया कि ऐसी व्याख्यान मालाएँ भूत से भविष्य को जोड़ने की कड़ी में योगदान देंगी।
धन्यवाद ज्ञपित किया
कार्यक्रम के आयोजन सचिव निदेशक आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ डॉ. धर्मेश हरवानी ने धन्यवाद ज्ञपित किया। कार्यक्रम का संचालन अँग्रेजी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. प्रगति सोबती ने किया।
कार्यक्रम में कुलसचिव अरुण प्रकाश शर्मा, अतिरिक्त कुलसचिव बिट्ठल बिस्सा, प्रोफेसर अनिल कुमार छंगाणी, प्रोफेसर राजराम चोयल, डॉ. गौतम मेघवंशी, डॉ. अभिषेक वशिष्ठ, डॉ. अनिल दुलार, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. प्रभुदान चारण, डॉ. लीला कौर सहित विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्तिथ रहे।


