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डॉक्टर्स के साथ दुर्व्यवहार करना अनुचित,डॉक्टर ईलाज के लिए ही हैं लिहाजा ईलाज ही करेंगे

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ कथित असभ्य व्यवहार का मामला केवल एक व्यक्ति विशेष का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारे चिकित्सा तंत्र और समाज के बीच बढ़ती संवेदनहीनता का भी संकेत है। यह समझना आवश्यक है कि किसी भी अस्पताल, विशेषकर ट्रॉमा सेंटर जैसी अत्यंत संवेदनशील इकाई में कार्यरत डॉक्टरों का पहला और अंतिम उद्देश्य मरीज का उपचार और जीवन रक्षा होता है। ऐसे में इलाज कर रहे चिकित्सक के कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह पूरे चिकित्सा वातावरण को प्रभावित करने वाला कृत्य है।

रेजिडेंट डॉक्टर दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं। सीमित संसाधनों, अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव के बीच वे मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। रात के समय ट्रॉमा सेंटर की परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण होती हैं, जहां हर क्षण जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष चलता है। ऐसे समय यदि कोई व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, डॉक्टर के कार्य में बाधा डालकर उन्हें “इलाज सिखाने” का प्रयास करे, तो यह चिकित्सा व्यवस्था की गरिमा के विरुद्ध माना जाएगा।

डॉक्टर कोई विरोधी पक्ष नहीं

समाज को यह समझना होगा कि डॉक्टर कोई विरोधी पक्ष नहीं हैं। वे अस्पताल में केवल मरीज के हित और कल्याण के लिए मौजूद रहते हैं। किसी चिकित्सक पर बिना ठोस आधार के दुर्व्यवहार का आरोप लगाना या उनकी प्रतिष्ठा को सार्वजनिक रूप से ठेस पहुंचाना उचित नहीं कहा जा सकता। यदि किसी प्रकार की शिकायत हो भी, तो उसके लिए संस्थागत प्रक्रिया और प्रशासनिक माध्यम उपलब्ध हैं। लेकिन ट्रॉमा सेंटर जैसे गंभीर स्थान पर हंगामा, दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप स्थिति को और अधिक जटिल बना देता है।

घटनाओं को राजनीतिक रंग देना खतरनाक

दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि कुछ लोग और तथाकथित नेता अस्पतालों को जनसेवा से अधिक अपनी लोकप्रियता बढ़ाने का माध्यम बना लेते हैं। मरीजों की पीड़ा के नाम पर अस्पतालों में अनावश्यक दखल देना, चिकित्सकों पर दबाव बनाना और घटनाओं को राजनीतिक रंग देना एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है। इससे डॉक्टरों का मनोबल टूटता है और चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होती है। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में युवा चिकित्सकों का सरकारी अस्पतालों में कार्य करने का उत्साह भी कम हो सकता है।

डॉक्टरों को मिलना चाहिए सुरक्षित वातावरण

पीबीएम जैसे बड़े अस्पताल में अनुशासन और चिकित्सा गरिमा बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अस्पताल उपचार का स्थान है, राजनीतिक प्रदर्शन या व्यक्तिगत प्रसिद्धि का मंच नहीं। डॉक्टरों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए ताकि वे बिना भय और दबाव के अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकें। समाज को भी चिकित्सकों के प्रति विश्वास और सम्मान बनाए रखना होगा, क्योंकि अंततः वही कठिनतम परिस्थितियों में मानव जीवन बचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं।