Loading Now

updates

बीकानेर में बोर्डर टूरिज्‍म, काम कम बातें ज्‍यादा

Border tourism in Bikaner: More talk, less action.

– नीरज जोशी

बीकानेर में होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान (बीकानेर संभाग) की नवगठित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में बीकानेर के बॉर्डर टूरिज्म की बात की एक बार फिर की गई। केंद्रीय मंत्री व बीकानेर के सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि बीकानेर में बॉर्डर टूरिज्म को विकसित करने की असीम संभावनाएं हैं। वैसे हकीकत यह है कि बीकानेर में बॉर्डर टूरिज्म पिछले कुछ वर्षों से लगातार चर्चा में रहा है। सरकार, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और जनप्रतिनिधियों ने कई घोषणाएं कीं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रगति अभी भी सीमित है।  

सांचू बॉर्डर पोस्ट को पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा

साल 2022 में BSF ने घोषणा की कि राजस्थान में तीन बॉर्डर पोस्टों पर बॉर्डर टूरिज्म विकसित किया जाएगा। इनमें जैसलमेर की बबलियां पोस्ट के साथ बीकानेर की सांचू पोस्ट और खाजूवाला क्षेत्र भी शामिल थे। उद्देश्य था कि वाघा-अटारी की तरह सीमित स्तर पर पर्यटक सीमा क्षेत्र का अनुभव कर सकें। घोषणा हुई कि सांचू और खाजूवाला में भी BSF द्वारा नियमित बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी आयोजित की जाएगी, जिससे देशभक्ति पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। राजस्थान पर्यटन विभाग ने भी सांचू पोस्ट को प्रचारित किया। योजना में शामिल था—पर्यटक गैलरी, कैफेटेरिया, पार्किंग, शौचालय, व्यूइंग एरिया, सीमा दर्शन की व्यवस्था इन सुविधाओं का उद्देश्य नियंत्रित तरीके से पर्यटकों को सीमा तक पहुंचाना था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं के सीमा क्षेत्र के दौरों के दौरान सीमा क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के साथ पर्यटन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

आज (2026) की वास्तविक स्थिति

बीकानेर में अभी तक ऐसा नियमित और बड़े पैमाने का बॉर्डर समारोह विकसित नहीं हो पाया है जैसा अमृतसर के वाघा बॉर्डर पर होता है।सांचू और खाजूवाला के कुछ क्षेत्रों में प्रवेश आज भी सुरक्षा कारणों से नियंत्रित है। आम पर्यटक हर समय स्वतंत्र रूप से नहीं जा सकते। कई बार पूर्व अनुमति या विशेष अवसरों पर ही प्रवेश संभव होता है। घोषित सुविधाओं में से अधिकांश का विकास सीमित स्तर पर दिखाई देता है। बड़े पैमाने के पर्यटन केंद्र जैसी सुविधाएं अभी विकसित नहीं हो सकी हैं। यदि बॉर्डर टूरिज्म पूरी तरह विकसित होता तो—होटल, होम-स्टे, स्थानीय हस्तशिल्प, ऊंट सफारी, रेगिस्तानी पर्यटन, स्थानीय परिवहन को बड़ा लाभ मिल सकता था, लेकिन अभी इसका प्रभाव सीमित है। भारत-पाक सीमा की संवेदनशील सुरक्षा, ड्रोन और तस्करी की बढ़ती घटनाएं, BSF की सुरक्षा प्राथमिकताएं, पर्यटन के लिए सीमित बजट, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का धीमा विकास। हाल के वर्षों में सीमा पर ड्रोन के माध्यम से हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी की घटनाओं ने भी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बना दिया है।

संभावनाएं अभी भी बहुत बड़ी हैं

यदि सरकार और BSF संयुक्त रूप से योजना को आगे बढ़ाएं तो बीकानेर में सीमांत पर्यटन विकसित हो सकता है। इसके लिये जरूरी है नियमित बीटिंग रिट्रीट समारोह, बॉर्डर व्यू गैलरी, BSF संग्रहालय, 1971 युद्ध एवं सीमा सुरक्षा थीम पार्क, डेजर्ट सफारी + बॉर्डर टूर पैकेज सांचू–खाजूवाला–करणी माता–बीकानेर शहर को जोड़ने वाला पर्यटन सर्किट। इससे बीकानेर को जैसलमेर के बाद राजस्थान का दूसरा प्रमुख बॉर्डर पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है।

वास्तविक स्थिति

बीकानेर में बॉर्डर टूरिज्म को लेकर घोषणाएं तो कई हुईं—विशेषकर सांचू पोस्ट और खाजूवाला को पर्यटन मानचित्र पर लाने की। लेकिन वर्ष 2026 तक इसकी वास्तविक स्थिति यह है कि परियोजना पूरी तरह विकसित पर्यटन मॉडल का रूप नहीं ले सकी है। कुछ प्रारंभिक पहल और सीमित सुविधाएं मौजूद हैं, परंतु व्यापक पर्यटन अवसंरचना, नियमित आकर्षण और बड़े पैमाने पर पर्यटकों की आवाजाही अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है।

Share this content:

You May Have Missed