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प्रो. वीसी का काम कर रहा है एमजीएसयू वीसी का खास व्‍यक्ति अमित कुमार पांडे

Amit Kumar Pandey—a close associate of the MGS University Vice-Chancellor—is effectively performing the duties of the VC.

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। महाराजा गंगासिंह विश्‍वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के कुलगुरू प्रो. मनोज दीक्षित पर विवि में वित्तिय, प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताओं की अनेक शिकायतें राज्‍यपाल व मुख्‍यमंत्री को तथ्‍यों सहित भेजे जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से स्‍थानीय जनप्रतिनिधि व विवि अधिकारी-कार्मिकों में रोष है। ऐसा नहीं है कि सरकार ने जांच के आदेश नहीं दिये हैं मगर मुख्‍य मांग कि जांच के दौरान कुलगुरू को पद से हटाया जाए यह मांग अब तक मानी नहीं जाने से लोगों को आशंका है कि जांच प्रभावित ही होगी।

विवि अधिकारी कर्मचारी इस बात से अचंभित है कि विवि में प्रश्‍न पत्र प्रकाशित करवाने का जो काम दो करोड़ रुपये में होता था उस पर अब 10 करोड़ रंपये कैसे खर्च हो रहे हैं। इस संबंध में बीकानेर से भाजपा नेता डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया ने राज्‍यपाल व सीएम को ज्ञापन भेजा हुआ है। श्रीडूंगरगढ़ के विधायक ताराचंद सारस्‍वत ने विधानसभा में गत माह ही एमजीएसयू के कुलगुरू प्रो दीक्षित के खिलाफ भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी।

बताया यह जा रहा है कि कुलगुरू प्रो. दीक्षित द्वारा यूपी की अवध युनिवर्सिटी के एक व्‍यक्ति अमित कुमार पांडे को यहां युनिसेफ के प्रतिनिधि के रूप में विवि द्वारा गठित महाराजा गंगासिंह सतत शोधपीठ में रिसर्च कार्मिक नियुक्‍त करवा लिया गया है। यह पांडे पिछले डेढ़ साल से कुलगुरु प्रो. दीक्षित के लिये विवि में प्रो वीसी के रूप में विवि अधिकारी कार्मिकों को मौखिक रूप में निर्देशा जारी कर अपने और वीसी के आर्थिक लाभ के काम करवाता है।

टेंडर पास करवाने की एवज में 7 लाख रुपये

पांडे पहले यूपी की अवध विवि में था। यहां प्रो वीसी के रूप में काम करता है। कॉलेजों में सीधे बात करता है। इंटरनल ट्रांसफर करवा सकता है। फर्मों से सीधी बात करना। यह सब सार्वजनिक रूप से होता है लुकाछिपी नहीं है। वीसी ने इसे युनिसेफ के प्रोजेक्‍ट से अटेच करा दिया। महाराजा गंगासिंह सतत शोधपीठ बना दी। यूनिसेफ से एमओयू कर लिया। युनिसेफ इसे रुपये देती है। डॉ. मेड़तिया के ज्ञापन में बताया गया है कि पांडे को अजमेर की किसी फर्म के प्रतिनिधि मनोज ने 24 दिसंबर 2024 को एमजीएसयू में एक टेंडर पास करवाने की एवज में 7 लाख रुपये देने थे मगर उसी दिन विवि में एसीबी का छापा पड़ा और यह काम नहीं हो सका मगर इसकी जांच भी सही नहीं हुई। पैसों का लेन देन कर मामला रफा दफा करवा दिया। एसीबी के छापे एफआर लगाकर इतिश्री कर ली गई।

एसीबी की कार्रवाई पूरी करवाई जाए

स्‍थानीय जनप्रतिनिधियो की मांग है कि एसीबी की यह कार्रवाई पूरी करवाई जाए। ऐसे मामलों की शिकायत का ज्ञापन बीकानेर शहर भाजपा के पूर्व उपाध्‍यक्ष डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया ने 28 नवंबर 2025 सरकार को भेजा। वित्‍त विभाग के अंकेक्षण अनुभाग ने 6 जनवरी 2026 को रिपोर्ट की। इस सब के जवाब में राज्‍य सरकार के शिक्षा (ग्रुप-4) विभाग की ओर से संयुक्‍त सचिव उच्‍च शिक्षा डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने महाराजा गंगासिंह विश्‍वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के कुल सचिव को 19 जनवरी 2026 को पत्र भेजकर एमजीएसयू में व्‍याप्‍त वित्तिय, प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताओं के संबंध में वित्‍त विभाग के अंकेक्षण अनुभाग से 6 जनवरी 2026 को प्राप्‍त टीप के संबंध में तथ्‍यात्‍क रिपोर्ट भेजने को कहा। तब से यह जांच अब तक पूरी हो ही नहीं सकी है।

अनियमितताओं राज अब भी विवि में जारी

कुलगुरू प्रो. दीक्षित और उसके खास व्‍यकित पांडे की अनियमितताओं राज अब भी विवि में जारी है। डॉ. मेड़तिया के अनुसार एमजीएसयू के कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित के ढाई साल के कार्यकाल में विवि में जमकर खुले आम वित्तिय, प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताएं भ्रष्‍टाचार किया है। मेड़तिया के ज्ञापन के अनुसार कुलगुरू प्रो दीक्षित अमित कुमार पांडे को विवि में कोई पद देना चाहते थे, यह संभव नहीं हुआ तो पांडे को यूनिसेफ के एक प्रोजेक्‍ट का रिसर्च कार्मिक बना दिया। इस प्रोजेक्‍ट के प्रभारी प्रो. राजाराम चोयल है। पांडे व चोयल एकदूसरे को लाभान्वित कर रहे हैं। पांडे प्रोजेक्‍ट के बहाने विवि में अनैतिक काम कर रहे हैं। इस नियुक्ति से पहले ही पांडे विवि के गेस्‍ट हाउस में रहने लगा था।

विवि के गेस्‍ट हाउस में निशुल्‍क रहा

वेटरनरी विवि के गेस्‍ट हाउस में भी पांडे लंबे समय तक निशुल्‍क रहा। प्रो. दीक्षित को वेटरनी विवि का चार्ज भी मिला था। दोनों विवि में अमित पांडे, लेखा वर्ग के अधिकारी, एमजीएसयू के परीक्षा नियंत्रक तथा कुछ बाहरी लोग मिलकर टेंडर और प्राइवेट कॉलेजों के कार्यों में पंचायती कर लाखों रूपये कमा रहे थे।  अमित पांडे की अवैध नियुक्ति की भी जांच की मांग की। अनियमितताओं में पांडे की संलिप्‍तता की जांच उच्‍च स्‍तरीय समिति से कराने की मांग की। ज्ञापन के अनुसार कुलगुरू ने विवि की अधिशेष निधि का दुरुपयोग कर 50 लाख रुपये की लागत का वाहन खरीदा। पता नहीं विवि प्रबंध मंडल और वित्‍त नियंत्रक ने नये वाहन खरीदने की अनुमति कैसे दी। कुलगुरू ने अपनी इनोवा कार कुल सचिव को आवंटित कर दी। जबकि कुलसचिव की कार गायब कर दी गई।

वाहनों का भी दुरुपयोग किया

वेटरनी का चार्ज भी प्रो. दीक्षित के पास था तब उन्‍होंने वहां के वाहनों का भी दुरुपयोग किया। कुलगुरु मनोज दीक्षित पर आरोप हैं कि उन्‍होंने दोनो विवि के वित्‍त नियंत्रक की मदद से यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के पैसे को पंजाब नेशनल बैंक से एचडीएफसी बैंक में ट्रांसफर करने के प्रयास किए। इसको कर्मचारियों ने सामूहिक विरोध कर रुकवाया। आरोप है कि कुलगुरू ने विवि में राजनीति विज्ञान विभाग नहीं होने के बावजूद राजनीति विज्ञान की  अंतराष्‍ट्रीय सेमिनार करवाई। विवि में अपने निवास व गेस्‍ट हाउस के लिये करोड़ों रूपये के गैर जरूरी महंगे फर्नीचर व इलेक्‍ट्रानिक उपकरण खरीदे। वर्षों से नियम विरूद परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्‍त काम दे रखा है।

निजी व परिचित प्रकाशकों की किताबों की खरीद की

कुलगुरू प्रो. मनोज दीक्षित की स्‍वीक्रति से करोड़ों रूपये की किताबें कमीशन प्राप्ति के लालच में पुस्‍ताकालय के लिये मंगवाई गई। इस कार्य में पुस्‍तकालय अध्‍यक्ष को शामिल रखा गया। वीसी के खास अमित कुमार पांडे के निजी व परिचित प्रकाशकों द्वारा कई डॉलर्स में कीमत वाली महंगी (और विद्यार्थियों के किसी काम की नहीं) वाली किताबों की खरीद यूनिवर्सिटी के केंद्रीय पुस्तकालय में हुई। विभागाध्यक्षों से जबरन प्रकाशकों की लिस्टे देकर पुस्तकों की रिकमेंडेशन करवाई गई/जाती हैं। इस घोटाले में लाइब्रेरियन उमेश शर्मा भी शामिल है। कुलपति ने उत्‍तर पुस्तिकाओं की खरीद व पुरानी उत्‍तर पुस्तिकाओं की निलामी में अनियमितताएं कर कमीशन कमाया गया।

प्रश्‍न पत्रों की मुद्रण की दरें बढ़ाकर अनियमितताएं की

इसके लिये वित्‍त नियंत्रक अरविंद बिश्‍नोई ने सजातिय लोगों की समित गठित किया।  कुलपति मनोज दीक्षित की नियुक्ति के बाद तो प्रश्‍न पत्रों की मुद्रण की दरें बढ़ाकर अनियमितताएं की गई। कुलगुरू के निजी व्‍यकित अमित कुमार पांडे गोपनीय प्रेस से राशि के लेनदेन का काम करता है।  साथ ही एक प्राइवेट कॉलेज के मालिक व प्राचार्य सतपाल स्‍वामी पर आरोप है कि स्‍वामी सभी कॉलेजों से संपर्क कर कुलगुरू के लिये लेनदेन की कार्रवाई करते हैं। कुलगुरू ने अनियमित तरीके से स्‍वामी को डीन बनाया। बोम का सदस्‍य भी बनाया। स्‍वामी की नियुक्ति की जांच होनी चाहिये। कुलगुरू प्रो. दीक्षित पर आरोप है कि उन्‍हेांने अक्‍टूबर 2024 में कुल सचिव व वित्‍त नियंत्रक के कार्य बांटे। टेंडर के काम वित्‍त नियंत्रक को दे दिये।

जबकि नियमानुसर कार्यालयाध्‍यक्ष के सभी कार्य कुल सचिव द्वारा ही किए जाते हैं। विवि में कौन क्‍या काम करेगा यह पहले से तय है मगर प्रो. दीक्षित ने मनमर्जी से पत्राचार किया। स्‍थानीय जनप्रतिनधियों के अनुसारअनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई नहीं होने से अब विवि में भ्रष्‍टाचार चरम पर है। कुलगुरू प्रो. मनोज दीक्षित के पद पर रहते हुए जांच सही नहीं हो सकती।

इनका कहना है

हमारी शिकायत पर राजभवन ने राज्य सरकार से जवाब मांगा, राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने एमजीएसयू के मामले में संभागी आयुक्त से सात दिवस में जांच कर रिपोर्ट पेश करने का कहा, चूंकि रजिस्ट्रार का चार्ज अतिरिक्त संभागीय आयुक्त के पास है, ऐसे में वो अपने वीसी के विरुद्ध क्या कांच करे? मामला ठंडे बस्ते में है। अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। हम निराश हैं।

डॉ भगवान सिंह मेड़तिया

पूर्व जिला उपाध्‍यक्ष भाजपा बीकानेर

इनका कहना है

शिकायत के संदर्भ में राजभवन से पत्र आया है, जिसका जवाब भिजवाया जा रहा है। शिकायत से भारतीय दंड संहिता के अनुसार संबंधित तथ्यों की सत्यता की उपलब्धता शिकायतकर्ता की जिम्मेदारी है, मैं इसका जवाब भिजवा रहा हूँ।

प्रो. मनोज दीक्षित

कुलगुरु

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