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एमजीएसयू में हुई लघुचित्र शैली के इतिहास, प्रभाव पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला

अंतरराष्‍ट्रीय मिनिएचर आर्टिस्‍ट महावीर स्‍वामी ने बीकानेर शैली की दी जानकारी

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा) विद्यार्थियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रम में उद्यमशीलता जगाने हेतु बुधवार को महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के इतिहास विभाग द्वारा राजस्थानी लघु चित्र शैली के इतिहास और प्रभाव पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले बीकानेर के मिनिएचर पेंटिंग आर्टिस्‍ट महावीर स्वामी ने विद्यार्थियों को मिनिएचर पेंटिंग्स की बीकानेर शैली पर उद्बोधन दिया। स्वामी ने उदाहरणों के साथ विद्यार्थियों को पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से लघु चित्र शैली के इतिहास व प्रभाव पर एक लाभकारी उद्बोधन दिया।

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इसमें स्‍वामी ने अपने संग्रह से बारहमासी श्रृंखला के आषाढ़ लघु चित्र, ब्रुकलिन व फिलाडेल्फिया म्यूज़ियम अमेरिका में रखी बैकुंठ दर्शन व अपने गुरु के साथ वार्ता करते बीकानेर के महाराजा सूरत सिंह के साथ साथ रामायण श्रृंखला से लक्ष्मण मूर्छा और 16वीं सदी के कुंभ मेले के लघु चित्र भी स्लाइड के माध्यम से दिखाए। कोरिया के चित्रकार विशिष्ट अतिथि बे सुंग वॉन ने दक्षिण कोरिया में मिनिएचर पेंटिंग्स के प्रभाव को मंच से उल्लेखित किया व अपनी भारतीय चित्रकला सीखने के सफर पर प्रकाश डाला।

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An international workshop on the history and influence of miniature painting style was held at MGSU

लघुचित्र शैली में प्रमुखता से हुई है पौराणिक दृश्यों का प्रस्तुति-डॉ. मेघना शर्मा

एमजीएसयू के इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ मेघना शर्मा ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि लघु चित्र शैली में पौराणिक, धार्मिक और राजसिक दृश्यों का प्रमुखता से प्रस्तुतीकरण होता है। जिसमें सुनहरे रंग का सर्वाधिक प्रयोग होता है। उन्होंने मंच से अतिथि के कृतित्व से भी सभागार को रूबरू करवाया। डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रम में उद्यमशीलता जगाने हेतु ये आयोजन किया गया है।

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चित्रकार ओसामू तेज़ुका की पुस्तकें दिखाई

आयोजन सचिव डॉ. खुशाल पुरोहित ने जापान के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले चित्रकार ओसामू तेज़ुका की पुस्तकें विद्यार्थियों को दिखाई जो बुद्ध के जीवनकाल पर मंघा कला आधारित हैं और जिन्हें कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। डॉ. रीतेश व्यास धन्यवाद ज्ञापित किया।

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कार्यशाला में अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. गोपाल व्यास, रिंकू जोशी, जसप्रीत सिंह, भगवान दास सुथार, किरण, रामोवतार उपाध्याय, डॉ. नमामी शंकर आचार्य, तेजपाल भारती, उमेश पुरोहित तथा विद्यार्थी शामिल रहे। इससे पूर्व मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करने के उपरांत कार्यशाला आरंभ की गई।

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