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राहत की बात- नाल-पलाना के बीच 448 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा गुड्स ट्रेन बाईपास

बीकानेर के कोटगेट व सांखला फाटक कम हो सकेगा यातायात का दबाव

मालगाड़ियां बीकानेर स्टेशन आए बिना सीधे मेड़ता रोड की तरफ निकल सकेगी

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर शहर के नागरिकों के लिए लंबे समय से जी का जंजाल बने रेल फाटकों के जाम से अब जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। बीकानेर रेलवे स्टेशन के यार्ड पर बढ़ते ट्रैफिक भार और शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाली मालगाड़ियों की भारी संख्या को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने ‘नाल-पलाना गुड्स ट्रेन बाईपास’ के निर्माण की दिशा में कार्य तेज कर दिया है। 21 जून को बीकानेर दौरे के दौरान रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 448 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

वर्तमान में बीकानेर शहर के भीतर स्थित कोटगेट और सांखला रेल फाटक आमजन के लिए बड़ी परेशानी का सबब बने हुए हैं। मालगाड़ियों की अधिक आवाजाही के कारण ये फाटक दिन भर में तीन दर्जन बार बंद होते हैं, जिससे शहर के मुख्य मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। लोगों को रेलगाड़ियों के गुजरने के इंतजार में मजबूरी में फाटक के पास काफी देर तक रुकना पड़ता है, जिससे न केवल उनका कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं और स्कूली बच्चों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

कम होगा शहर की रेल लाइनों पर दबाव  

इस नई रेल लाइन के निर्माण का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जैसलमेर की ओर से आने वाली मालगाड़ियां बीकानेर स्टेशन या यार्ड में आए बिना ही सीधे मेड़ता रोड की तरफ निकल जाएंगी। इससे बीकानेर शहर की रेल लाइनों पर दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा और शहर में लगने वाले फाटकों के जाम से आमजन को स्थायी राहत मिलेगी। परिचालन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह बाईपास न केवल मालगाड़ियों को कम समय में उनके गंतव्य तक पहुंचाएगा, बल्कि मालगाड़ियों के शोर और उनके कारण होने वाले प्रदूषण से भी शहरवासियों को निजात दिलाएगा।

तैयार की जा रही है DPR

परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) फिलहाल तैयार की जा रही है। रेल प्रशासन का मानना है कि इस बाईपास के बनने से रेलवे की परिचालन क्षमता में तो वृद्धि होगी ही, साथ ही शहर के मुख्य इलाकों में यातायात का दबाव कम होने से आमजन का जीवन और अधिक सुगम हो जाएगा। यह कदम शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मील का पत्थर साबित होगा।

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