भामाशाहों के सहयोग से 25 लाख की तत्काल सहायता, 50 लाख का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
संविदा पर नौकरी और लापरवाही साबित होने पर डॉक्टरों/स्टाफ पर एफआईआर का आश्वासन।
NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद जान गंवाने वाली प्रसूता शारदा नायक की मौत के चौथे दिन आखिरकार प्रशासन और परिजनों के बीच गतिरोध टूट गया है। बुधवार को प्रशासन के साथ हुई वार्ता में सहमति बनने के बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया। अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा, जिसके बाद श्रीरामसर गांव की रहने वाली शारदा का अंतिम संस्कार होगा।
कांग्रेस देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने बताया कि एसडीएम राजेश नायक के साथ हुई बातचीत में प्रशासन ने कई मांगें मान ली हैं। समझौते के तहत जन सहयोग (भामाशाहों) के माध्यम से पीड़ित परिवार को तत्काल 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार को 50 लाख रुपए के मुआवजे का प्रस्ताव भेजा जाएगा और परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी दी जाएगी। समझौते में यह भी तय हुआ है कि परिजनों की ओर से परिवाद दिए जाने पर पुलिस मामले की जांच करेगी।
यदि जांच में किसी डॉक्टर या कर्मचारी की लापरवाही साबित होती है, तो उनके खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बीसी घीया ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उनका दावा है कि डॉक्टरों व स्टाफ की तरफ से इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। वहीं घटना के बाद से मृतका का पति और परिजन गहरे सदमे और आक्रोश में थे। न्याय की मांग को लेकर मंगलवार शाम मॉर्च्युरी के बाहर मृतका के पति ने खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगाने का प्रयास किया था।
ये है पूरा मामला
पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के दौरान बाहर से मंगवाए गए ‘ऑक्सीटोसिन’ इंजेक्शन के उपयोग के चलते 18 मई के बाद से एक-एक कर 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी, जिसे अस्पताल प्रशासन ने 6 जून तक छिपाए रखा। हालत बिगड़ने पर सभी को आईसीयू में भर्ती कर डायलिसिस किया गया। अस्पताल में भतीर् इन 6 महिलाओं में से दो की मौत हो गई। 19 जून को प्रीति नायक और 21 जून को शारदा नायक ने दम तोड़ दिया। इमरती और कमला का अभी भी इलाज जारी है। तारा देवी और राहिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।


