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जो आवरणों में ढका- छुपा है, वह सच सामने आना चाहिए- हरीश बी. शर्मा

The truth that is hidden behind veils must come to light - Harish B. Sharma

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। कवि, नाटककार एवं पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने कहा कि जो दिखता है उसे लिखने के बजाय जो आवरणों में ढका- छुपा है, वह सच सामने आना चाहिए। शर्मा जिला उद्योग संघ सभागार में आयोजित अपने राजस्थानी से अनूदित कहानी संग्रह बाजोटके लोकार्पण समारोह में अपना लेखकीय वक्तव्य दे रहे थे। उन्‍होंने कहा, हमें लेखक होने की अपनी जिम्मेदारियों को न केवल समझना होगा बल्कि उनको ठीक तरह से निभाने के प्रयास भी करने होंगे।

हरीश बी ने कहा कि हम पुस्तक खरीदकर खुश होते हैं लेकिन रचनाकार तब खुश होता है जब आप उस पुस्तक को अपने भीतर उतारते हैं। उन्‍होंने कहा कि हमें अच्छे साहित्य के द्वारा पठन-पाठन की संस्कृति को फिर से विकसित करना होगा। इससे पूर्व कवि, नाटककार एवं पत्रकार हरीश बी. शर्मा के इस कहानी संग्रह ‘बाजोट’ का लोकार्पण कार्यक्रम अध्यक्ष मधु आचार्य ‘आशावादी’, मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि राय रावत, गायत्री प्रकाशन की गायत्री शर्मा, प्रवीण कुमार शर्मा और मीनाक्षी शर्मा ने किया।

बाजोटका लघु प्रतिरूप भेंट किया

कार्यक्रम के आरम्भ में कहानीकार हरीश बी. शर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार धीरेन्द्र आचार्य को पुस्तक की प्रथम प्रति और स्मृति चिन्ह के रूप में ‘बाजोट’ का लघु प्रतिरूप भेंट किया। लोकार्पण के उपरांत संग्रह की दस कहानियों के साथ ही ‘कहानी का कहन’ परिसंवाद में राजाराम स्वर्णकार, डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, इरशाद अज़ीज़, मनीषा आर्य सोनी, विप्लव व्यास, श्रीमती ऋतु शर्मा, रामसहाय हर्ष, व्यास योगेश राजस्थानी एवं आनन्द मस्ताना ने कहानियों के शिल्प, कथ्य और कथा वस्तु के साथ ही वर्तमान जीवन में कथा साहित्य की उपादेयता पर सार्थक संवाद किया।

कहानी का कहनविमर्श कार्यक्रम

इस अवसर पर आयोजित ‘कहानी का कहन’ विमर्श कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं रंगकर्मी मधु आचार्य ‘आशावादी’, स्विट्जरलैंड के गैलन विश्वविद्यालय की मैण्टोर डॉ. रश्मि राय रावत, कवि-कथाकार एवं पत्रकार संजय आचार्य वरुण, मोटिवेशनल स्पीकर सेतु माथुर आदि वक्‍ताओं ने कहा कि हरीश की कहानियां अपने समय को अपने भीतर प्रतिबिम्बित करती हैं। शर्मा की कहानियां उन मुद्दों पर बात करने का आमंत्रण देती हैं, जिनसे हम अक्सर बचने के प्रयास करते हैं। उन्‍होंने अपनी कहानियों में समाज के सत्य को बिना कहे भी सफलता से उद्घाटित किया है।

कार्यक्रम में शामिल हुए गणमान्‍यजन

कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि- कथाकार मालचंद तिवाड़ी, बुलाकी शर्मा, राजेंद्र जोशी, वरिष्ठ पत्रकार दीपचंद सांखला, रंगकर्मी रवि माथुर, प्रमोद कुमार शर्मा, मोहम्मद फारूक रज़ा, पी. शीतल हर्ष, बाबूलाल छंगाणी, संजय पुरोहित, योगेन्द्र पुरोहित, ऋषिमोहन जोशी, नरेन्द्र व्यास, मोनिका गौड़, सागर सिद्दीकी, कासिम बीकानेरी, रेणु चौहान सोलंकी, विशाल सोलंकी, गिरीराज खैरीवाल, पेन्टर धर्मा, अमित गोस्वामी, महेश उपाध्याय, दयाशंकर शर्मा, मनमोहन शर्मा, अब्दुल शकूर सिसोदिया, मधुसूदन सोनी, प्रणीत सुशील, अब्दुल सत्तार कमल,सौरम शर्मा, जुगल किशोर पुरोहित एवं शिवशंकर व्यास आदि उपस्थित रहे। वास्तुविद आर के सुतार ने आभार ज्ञापित किया।

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