MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। सरकार के प्रशासनिक ढांचे में कुछ विभाग ऐसे होते हैं जिन्हें “कमाऊ विभाग” के रूप में देखा जाता है। इन विभागों से सरकार को लगातार राजस्व प्राप्त होता है, इसलिए उनसे अपेक्षाएँ भी लगातार बढ़ती रहती हैं। परिवहन विभाग या आरटीओ इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है। विडंबना यह है कि जो विभाग लगातार सरकार के लिए आय का स्रोत बने रहते हैं, उन्हीं पर लक्ष्य, दबाव और जिम्मेदारियों का बोझ भी सबसे अधिक होता है।
परिवहन विभाग की स्थिति पर गौर करें तो हर वर्ष उससे राजस्व वसूली का लक्ष्य तय किया जाता है और अक्सर यह लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाता है। यानी विभाग ने यदि किसी वर्ष अच्छा राजस्व अर्जित किया, तो अगले वर्ष उसी उपलब्धि को उसकी नई न्यूनतम जिम्मेदारी बना दिया जाता है। परिणामस्वरूप अधिकारियों और कर्मचारियों पर लक्ष्य पूरा करने का लगातार दबाव बना रहता है।
आरटीओ के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात सड़कों पर सक्रिय रहते हैं। दुर्घटनाओं की आशंका, भारी वाहनों की आवाजाही, मौसम की कठिन परिस्थितियाँ और कई बार ट्रक ड्राइवरों व वाहन चालकों के साथ होने वाले विवाद,ये सब उनके काम का हिस्सा बन जाते हैं। इसके बावजूद उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे बिना किसी शिकायत के राजस्व संग्रहण को लगातार बढ़ाते रहें।
स्थिति तब और कठिन हो जाती है जब विभाग में आवश्यक पद भी खाली पड़े हों। कई स्थानों पर डीटीओ, परिवहन निरीक्षक और सहायक निरीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं। कम कर्मचारियों के साथ अधिक काम करना अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाता है। एक ओर राजस्व लक्ष्य की पूर्ति का दबाव होता है, दूसरी ओर फील्ड में काम करते समय दुर्घटनाओं का जोखिम और प्रशासनिक दायित्व भी साथ-साथ चलते हैं।
“ऑब्लिगेशन” और अनौपचारिक अपेक्षाओं की संस्कृति
इसके अतिरिक्त “ऑब्लिगेशन” और अनौपचारिक अपेक्षाओं की संस्कृति भी कई बार कर्मचारियों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन जाती है। इन सब परिस्थितियों के बीच आरटीओ विभाग के कर्मचारी अक्सर कोल्हू के बैल की तरह लगातार काम करते हुए दिखाई देते हैं,बिना रुके, बिना थके और बिना अधिक चर्चा के।
दूसरी ओर प्रशासन में ऐसे भी कई विभाग हैं जिनकी भूमिका मुख्यतः विकास कार्यों और योजनाओं पर खर्च करने की होती है। यह व्यवस्था प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक है, परंतु इससे यह प्रश्न भी उठता है कि राजस्व अर्जित करने वाले विभागों के कार्यभार, संसाधनों और मानवबल पर क्या पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है।
समय की आवश्यकता है कि सरकार ऐसे विभागों की कार्य परिस्थितियों, स्टाफ की कमी और लगातार बढ़ते लक्ष्यों की समीक्षा करे। राजस्व संग्रहण महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ उन लोगों की कार्य-स्थितियों को भी समझना जरूरी है जो यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। तभी प्रशासनिक संतुलन और कार्यक्षमता दोनों बनाए रखे जा सकते हैं।


