NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर में पंजीकृत गौशालाओं के प्रबंधकों, प्रतिनिधियों एवं उन्नत डेयरी संचालकों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि आज के समय में गौशालाओं को केवल ‘पशु शरण स्थल‘ के रूप में नहीं, बल्कि ‘नस्ल सुधार और अनुसंधान केंद्रों‘ के रूप में विकसित होना चाहिए तथा गौशाला प्रबंधकों को इस कार्य को प्राथमिकता प्रदान करनी चाहिए।
संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग, बीकानेर डॉ. बिरमाराम, निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने भी विचार रखे। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर व सीकर जिलों के गौशाला संचालक एवं प्रबंधक भाग ले रहे है जिनको विभिन्न विषयों पर व्याख्यान के साथ-साथ आदर्श गौशाला एवं डेयरी भ्रमण करवाया जायेगा।
प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. संजय सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया। मंचासीन अतिथियों द्वारा “पशु पालन नए आयाम” के नवीन अंक का विमोचन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम निदेशालय प्रसार शिक्षा एवं निदेशालय गोपालन, राजस्थान, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।


