MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों, संघर्ष और समाज में उनके योगदान को याद करने का अवसर देता है। हालांकि सच यह है कि महिलाओं को सम्मान देने के लिए किसी एक दिन की आवश्यकता नहीं होती। वे सदैव सम्मान और गौरव की पात्र रही हैं। फिर भी यह दिन हमें उन प्रेरणादायक उदाहरणों को सामने लाने का अवसर देता है, जिन्होंने अपने परिश्रम और प्रतिभा से नई मिसाल कायम की है। राजस्थान के बीकानेर जिले की बेटियों ने हाल के वर्षों में भारतीय प्रशासनिक सेवा में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया है कि अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।
बीकानेर की चार प्रतिभाशाली बेटियों,ट्विंकल अरोड़ा, अदिति अरोड़ा, प्रियंका चौधरी और नमिता सोनी ने यूपीएससी में सफलता प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया है। उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवारों के लिए बल्कि पूरे बीकानेर के लिए गर्व का विषय है। इन बेटियों की सफलता कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह उस सामाजिक सोच में परिवर्तन का संकेत है, जिसमें कभी बेटियों की शिक्षा और करियर को सीमित दृष्टि से देखा जाता था। आज वही बेटियां देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में पहुंचकर नीति निर्माण और शासन व्यवस्था में भागीदारी निभा रही हैं। यह परिवर्तन समाज की सकारात्मक प्रगति को दर्शाता है।
ट्विंकल अरोड़ा, अदिति अरोड़ा, प्रियंका चौधरी और नमिता सोनी
ट्विंकल अरोड़ा, अदिति अरोड़ा, प्रियंका चौधरी और नमिता सोनी की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। ग्रामीण और अर्धशहरी परिवेश में पली-बढ़ी अनेक लड़कियां अब यह विश्वास करने लगी हैं कि यदि संकल्प मजबूत हो और परिश्रम ईमानदारी से किया जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बीकानेर की इन बेटियों की उपलब्धि यह संदेश देती है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का परिचय दे रही हैं। आवश्यकता केवल उन्हें अवसर, प्रोत्साहन और समानता का वातावरण देने की है। जब समाज बेटियों पर विश्वास करता है, तो वे अपनी मेहनत और प्रतिभा से उस विश्वास को कई गुना बढ़ाकर लौटाती हैं।
किसी विशेष दिन की आवश्यकता नहीं
इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित होगा कि महिलाओं को सम्मान देने के लिए किसी विशेष दिन की आवश्यकता नहीं है। बीकानेर की बेटियों ने अपनी उपलब्धियों से यह सिद्ध कर दिया है कि वे किसी से कम नहीं, बल्कि अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनकी सफलता आने वाले समय में और भी अनेक बेटियों को नए सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा देती रहेगी।


