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नेताजी के जीवन से संकट प्रबंधन की प्रेरणा लें युवा : प्रो. अखिल रंजन गर्ग

Young people should draw inspiration from Netaji's life for crisis management Prof. Akhil Ranjan Garg

महाराजा गंगासिंह विश्‍वविद्यालय में मनाया बसंती पंचमी उत्सव व पराक्रम दिवस

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)  बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने कहा कि आज के युवाओं को नेताजी सुभाषचन्‍द्र बोस के जीवन से संकट प्रबंध्‍न की प्रेरणा लेनी चाहिये।

गर्ग शुक्रवार को महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के अधिष्ठाता छात्र कल्याण विभाग द्वारा आयोजित बसंतोत्सव और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि सुभाष चन्‍द्र बोस ने कैसे विपरीत परिस्थितियों में आज़ाद भारत का ना सिर्फ सपना देखा बल्कि स्वतंत्रता प्राप्त के लिए अपनी एक फौज तक खड़ी कर ली।

बोस ने देखा था आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न -डॉ. मेघना शर्मा

स्वागत उद्बोधन में डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मेघना शर्मा ने आयोजन का विषय प्रवर्तन करते हुए बसंती रंग को प्रकाश, पवित्रता, ऊर्जा और विवेक का प्रतीक बताया। डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि आधुनिक भारत में आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न सुभाष चन्‍द्र बोस ने देखा था जिसकी बात आज सरकारें करती हैं। आयोजन में पंडित राजेंद्र जोशी व टीम द्वारा संगीतमयी प्रस्तुति के दौरान तबले व सितार पर आज़ाद हिन्द द्वारा गया प्रथम राष्ट्रगान भी प्रस्तुत किया गया।

षडयंत्रों का शिकार बने नेताजी-प्रो. मनोज दीक्षित

 

अध्यक्षीय वक्तव्य में एमजीएसयू के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली के उस वक्तव्य पर चर्चा की जिसमें उन्होंने भारत को स्वतंत्रता आज़ाद हिन्द फौज के कारण देने की बात स्वीकारी। उन्होंने सुभाष के गांधी को लिखे पत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि सुभाष के लिए आज़ादी का अर्थ त्याग और बलिदान थे, किन्तु वे आंतरिक विरोधों और षडयंत्रों का शिकार बने। सवाल खड़ा होता है कि क्या इतिहास ने नेताजी के साथ न्याय किया? कुलगुरु ने निकट भविष्य में नेताजी के नाम पर परिसर में उद्यान स्थापित करने की भी घोषणा की।

देश का प्रथम राष्ट्रगान प्रस्तुत किया

सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. प्रभुदान चारण ने कार्यक्रम का संचालन किया। वित्त नियंत्रक देवेंद्र सिंह राठौड़ ने भी विचार रखे। समारोह में प्रो. राजाराम चोयल, डॉ. ज्योति लखानी, डॉ. अनिल कुमार दुलार, डॉ. गौतम मेघवंशी, डॉ. धर्मेश हरवानी, डॉ. लीला कौर, डॉ. अभिषेक वशिष्ठ, कमलकांत शर्मा के अलावा अतिथि शिक्षक व विद्यार्थी शामिल हुए।