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केन्‍द्रीय मेंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने जोड़बीड़ में किया लव-कुश वाटिका का लोकार्पण

Union Minister Arjun Ram Meghwal inaugurated the Luv-Kush garden in Jodbid

समारोह में पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों का किया सम्मान

बीकानेर, 16 जून। बीकानेर के जोड़बीड़ गाढ़वाला कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में नवनिर्मित लव-कुश वाटिका तथा वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान का लोकार्पण सोमवार को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया। समारोह के दौरान वन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर त्रिलोक चंद बाफना, शिल्पा कच्छावा, करणी सिंह, शुभम कलवानी, भूरजी नायक, डॉ. करण पुरोहित, सीताराम, कोजाराम, राजवीर सिंह तथा कमल राजपुरोहित का सम्मान किया।

उप वन संरक्षक (वन्यजीव) संदीप कुमार छलानी ने बताया कि जोड़बीड़ में विकसित लवकुश वाटिका के विकास पर लगभग 2 करोड रुपए हुए हैं। इनमें विजिटर्स के लिए शेल्टर, फेंसिंग, क्लियर वॉटर रिजर्वॉयर, दो प्रवेश द्वार, तलैया, दो किलोमीटर लंबी इको ट्रेल, वॉच टावर आदि बनाए गए हैं। अतिथियों ने तुलसी के पौधों का प्रतीकात्मक रूप से वितरण किया तथा पौधारोपण करने के साथ आमजन को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।

समारोह में केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा, मुझे पूर्ण विश्वास है कि लवकुश वाटिका स्थानीय पर्यावरण को सशक्त करने के साथ साथ प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी संदेश देगी। उन्‍होंने कहा कि जोड़बीड़ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थान है। यहां लव कुश वाटिका स्थापित होने से यह पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों को इसका अवलोकन करवाने का आह्वान किया तथा कहा कि यहां विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया जाएं, जिससे आमजन को इसके महत्व की जानकारी हो सके।

हरियालो राजस्थान’ संकल्प को मूर्त रूप देने का प्रयास

राज्‍य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ‘हरियालो राजस्थान’ संकल्प को मूर्त रूप देने के लिए वन विभाग पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत मुख्यमंत्री ने प्रत्येक प्रदेशवासी से पौधे लगाने, पोखर जोहड़, तालाब और नदियों का संरक्षण करने तथा प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए प्रेरित किया।

समारोह का संचालन संजय पुरोहित ने किया। सहायक वन संरक्षक डॉ. पूजा पंचारिया ने आभार जताया। समारोह में जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि, पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सागर, देहात भाजपा अध्‍यक्ष श्याम पंचारिया, संभागीय मुख्य वन संरक्षक हनुमान राम चौधरी, उप वन संरक्षक (वन्यजीव) संदीप कुमार छलानी, उप वन संरक्षक एस. सरथ बाबू, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्‍य डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, अनिल शुक्ला, गुमान सिंह राजपुरोहित, महावीर सिंह चारण, पूर्व शहर भाजपा अध्‍यक्ष विजय आचार्य, कोजाराम मेघवाल, शिवलाल तेजी, जितेंद्र सिंह राजवी, महावीर रांका, मनीष सोनी, पंकज अग्रवाल, किशन लाल गोदारा और गोपाल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

गिद्ध संरक्षण में जोड़बीड़ क्षेत्र की विशेष पहचान

केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा कि बीकानेर का जोड़बीड़ क्षेत्र गिद्ध संरक्षण के लिए पूरी दुनिया में विशेष पहचान रखता है। यहां सात दुर्लभ प्रजातियों के गिद्ध प्रतिवर्ष अक्टूबर से मार्च तक आते हैं। इसके मद्देनजर यहां ‘वल्चर ब्रीडिंग सेंटर’ की स्थापना की दिशा में कार्य किया जाएगा।

उन्‍होंने बताया कि वर्तमान में हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश सहित देश के चार राज्यों पर ‘वल्चर ब्रीडिंग सेंटर’ संचालित हैं। बीकानेर में यह केंद्र स्थापित हो, इसके लिए उच्च स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग चार करोड़ रुपए की लागत से यह केंद्र बीकानेर में खुलने से क्षेत्र को गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।

जल संरक्षण से मिलेंगे दूरगामी परिणाम

केन्‍द्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जल संरक्षण और ऐतिहासिक जल संग्रहण केंद्रों के संरक्षण का बीड़ा उठाया गया है। इसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।

उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज पानी की कीमत समझते थे तथा विभिन्न कार्यों में जल के उपयोग की सीमा भी निश्चित थी। मेघवाल ने कहा कि आज के दौर में पेयजल का अपव्यय रोकना सबसे जरूरी है। जल का दुरुपयोग करने वाले को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना जरूरी है।

लोक देवताओं का प्रिय वृक्ष है जाल का पेड़

मेघवाल ने जाल के पेड़ का महत्व बताया और कहा कि जाल का पेड़, बाबा रामदेव जी, हड़बूजी, गुरु जंभेश्वर भगवान सहित सभी लोक देवताओं के प्रिय वृक्षों में था। यह पेड़ वर्ष के बारह महीने हरा भरा रहता है।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘म्हारे हरिये वन रा सुवटिया, थाने राम मिले तो कईजे रे’ भजन सुनाया तथा इसके महत्व के बारे में जानकारी दी।

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