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देश की भावी पी‍ढ़ी को भारतीय ज्ञान परम्परा की चिकित्सकीय पद्धतियां सिखानी जरूरी-प्रो. दीक्षित

It is necessary to teach the medical methods of Indian knowledge tradition to the future generation of the country- Prof. Dixit

महाराजा गंगासिंह विवि व राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा के मध्य हुआ एमओयू

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)।   महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि देश के बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य विकास के लिये भावी पी‍ढ़ी को नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा की चिकित्‍सकीय पद्धतियां सिखाने की आवश्‍यकता है। इसी सोच को बढ़ावा देने के लिये महाराजा गंगासिंह विवि बीकानेर तथा राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केन्‍द्र गंगाशहर के मध्य एमओयू साइन किया गया है।

कुलपति रविवार को गंगाशहर स्थित राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केन्‍द्र गंगाशहर में आयोजित पत्रकार वार्ता में अपनी बात रख रहे थे। उन्‍होंने बताया कि इस संयुक्‍त प्रयास से युवाओं के रोजगार में नई संभावनाएं विकसित होगी तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अनुसार जीवन शैली को जीने के ढंग हमारी भावी पीढ़ी समझेगी। कुलपति ने बताया कि विद्यार्थियों को प्राकृतिक चिकित्सा व योग की शिक्षा देने के लिए विश्वविद्यालय तथा प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के साथ हुए एमओयू के तहत इसके लिये बनाए गए कोर्स में थ्योरी की पढ़ाई विश्वविद्यालय में होगी और प्रेक्टिकल प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में आयोजित होंगे।

राजस्‍थान ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) को तीन वर्ष बाद एडोप्‍ट किया

कुलपति प्रो. दीक्षित ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत यह तय हुआ कि भारतीय ज्ञान परम्परा की जो भी चिकित्सकीय पद्धतियां है उनमें भावी पीढ़ी को शिक्षित किया जाए। उन्‍होंने कहा कि राजस्‍थान ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) को तीन वर्ष बाद एडोप्‍ट किया। इस कारण हम इस रेस में तीन वर्ष पीछे हैं जिस रेस में भारत के अनेक राज्‍य और केन्‍द्रीय शिक्षा व्‍यवस्‍था चल चुकी है। ऐसे में हमने प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र से एक समझौता किया है। अब विद्यार्थियों को जल्‍द से जल्‍द प्राकृतिक चिकित्सा में शिक्षित किया जाएगा।

प्रो. दीक्षित ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा में शैक्षणिक अनुसंधान, शोधार्थियों को व्यवहारिक अनुभव, सेमिनार, रिचर्स प्रोजेक्ट के तहत ईंटरशिप व फील्ड विजिट कराएंगे। इससे नई रोजगार की संभावनाएं व उधमिता का अवसर भावी पीढ़ी को मिलेगा। इसके अलावा स्वस्थ जीवन शैली में प्राकृतिक चिकित्सा का उपयोग सैद्धांतिक ज्ञान के साथ ही प्रायोगिक ज्ञान के शिविर आयोजन करवाकर जनजागरण अभियान भी चलाएंगे ताकि प्राकृतिक चिकित्सा को विकसित किया जा सके।

संस्थान के उपाध्यक्ष श्रीभगवान अग्रवाल ने सभी का आभार जताया। पत्रकार वार्ता के दौरान संस्थान के उपाध्यक्ष श्रीभगवान अग्रवाल, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय आचार्य, श्रीरतन तंबोली, संपत पारीक, भंवरलाल गहलोत, संतोष व्यास, हनुमानसिंह चावड़ा, मोहम्मद रमजान अब्बासी, मूलचंद सोलंकी, आशुतोष रावल, केदार अग्रवाल, चन्द्रमोहन जोशी, धीरज पंचारिया, हरीश बिश्नोई, अजय काजला आदि मौजूद रहे।

औषधिविहिन उपचार शैली प्राकृतिक चिकित्साडॉ. वत्सला गुप्ता

राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र गंगाशहर की चिकित्सा अधिकारी डॉ. वत्सला गुप्ता ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा में पंचमहाभूत शैली से चिकित्सा प्रदान की जाती है। यह औषधिविहिन उपचार की शैली है। हम लोग मरीज को कोई दवा नहीं देते बल्कि प्राकृतिक तरीके से उसे प्रकृति से जोड़कर उसका उपचार करते हैं।

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ये दमा की बीमारी, लीवर की बीमारी व पेटजनित बीमारियों में मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है। राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के मंत्री बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि इस एमओयू से भविष्य में यहां पर राष्टीय व अंतरराष्टीय सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। इस भवन को विकसित कर यहां संसाधन जुटाए जाएंगे ताकि शोधार्थियों व विद्यार्थियों को शिक्षा व कोचिंग के दौरान आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।

कुलपति प्रो. दीक्षित का अभिनंदन किया

राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र गंगाशहर में रविवार को आयोजित समारोह में एमजीएसयू कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित का अभिनंदन किया गया। इस दौरान प्रो. दीक्षित को शॉल ओढ़ाकर, साफा पहनाकर व एक अभिनंदन पत्र भेंट किया गया।

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Vice Chancellor Prof. Dixit was felicitated

 

प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के मंत्री बनवारी शर्मा ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाने पर जोर दिया था इसी कारण पूरे विश्व में 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। उन्‍होंने बताया कि राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र पूरे प्रदेश का प्रथम प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र है। इसकी स्थापना 1951 में संस्थापक देवेन्द्र दत्त शर्मा ने की थी।

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