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उर्मूल सर्किल से दुपहिया उठाने की कार्रवाई: व्यवस्था या दिखावटी सख्ती?

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर के उर्मूल सर्किल पर खड़े दुपहिया वाहनों को अचानक नियम विरुद्धबताकर ट्रकों में भरकर यातायात थाने ले जाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि हमारी ट्रैफिक व्यवस्था की सोच और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वर्षों से कर्मचारी अपने वाहन इस सर्किल पर खड़े करते आए हैं। यह कोई छिपी हुई या नई व्यवस्था नहीं थी, बल्कि पुलिस की मौन स्वीकृति से विकसित एक व्यवहारिक समाधान था। ऐसे में बिना पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक सख्ती करना आमजन के साथ अन्याय जैसा प्रतीत होता है।

यातायात प्रबंधन का मूल उद्देश्य केवल नियमों का पालन करवाना नहीं, बल्कि सुगम और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना है। उर्मूल सर्किल का मामला इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता। यदि वहां खड़े दुपहिया वाहन वास्तव में यातायात में बाधा बन रहे होते, तो पुलिस को पहले ही चेतावनी देनी चाहिए थी और पार्किंग के लिए वैकल्पिक स्थान चिन्हित करना चाहिए था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि रोज़मर्रा की जरूरतों के तहत वाहन खड़ा करने वाले कर्मचारियों को अचानक दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

क्‍या दुपहिया वाहन ही यातायात व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या है?

सबसे बड़ा सवाल प्राथमिकताओं का है। क्या उर्मूल सर्किल पर खड़े दुपहिया वाहन ही यातायात व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या हैं? शहर में जगह-जगह फैले अतिक्रमण, संकरी सड़कों पर अव्यवस्थित ट्रैफिक, बसों का अनियंत्रित ठहराव ये सब लंबे समय से समस्या बने हुए हैं। हेड पोस्ट ऑफिस से चौखूंटी फाटक तक का मार्ग इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहां से निकलना आमजन के लिए रोज़ की चुनौती है। इन जटिल और वास्तविक समस्याओं पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय आसान लक्ष्य चुन लेना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाता है।

वाहनों को उठाना स्थायी समाधान नहीं  

उर्मूल सर्किल पर बसों का ठहराव ही दुपहिया वाहनों की पार्किंग का मुख्य कारण है। कर्मचारी बसों में यात्रा करने के लिए अपने वाहन वहीं खड़े करते हैं। यदि बसों के ठहराव के लिए स्पष्ट और सुव्यवस्थित व्यवस्था की जाए, तो दुपहिया वाहनों की यह समस्या स्वतः समाप्त हो सकती है। लेकिन इस मूल कारण को नजरअंदाज कर केवल वाहनों को उठाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

अस्थायी और दिखावटी समाधान

इसके अलावा, इस प्रकार की कार्रवाई में समय, श्रम और सरकारी संसाधनों का भी भारी उपयोग होता है। ट्रकों में वाहन भरकर थाने ले जाना, फिर उन्हें छोड़ने की प्रक्रिया यह सब एक अस्थायी और दिखावटी समाधान प्रतीत होता है, जो न तो व्यवस्था को बेहतर बनाता है और न ही जनता का विश्वास जीतता है।

अव्यवस्था को जन्म देगी अचानक सख्ती

प्रशासन को चाहिए कि वह दंडात्मक कार्रवाई के बजाय समन्वित और दीर्घकालिक समाधान पर ध्यान दे। स्पष्ट पार्किंग नीति, अतिक्रमण हटाने की ठोस कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन के लिए सुव्यवस्थित स्टॉपेज—ये कदम ही शहर की यातायात व्यवस्था को वास्तव में सुधार सकते हैं। वरना इस तरह की अचानक सख्ती केवल असंतोष और अव्यवस्था को जन्म देगी, समाधान को नहीं।

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