MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। विश्व प्रेस दिवस हर वर्ष हमें यह याद दिलाने आता है कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक गंभीर जिम्मेदारी है। इस वर्ष भी सोशल मीडिया पर इस दिवस की खूब चर्चा रही। आदर्श वाक्यों की भरमार रही, हर कोई अपने-अपने तरीके से प्रेस की महत्ता को रेखांकित करता नजर आया। लेकिन इस शोर-शराबे के बीच एक मूल प्रश्न फिर भी अनुत्तरित रह जाता है,क्या हम वास्तव में उस पत्रकारिता के आदर्शों पर खरे उतर रहे हैं, जिनकी हम बात करते हैं?
वर्तमान समय में प्रेस शब्द का प्रयोग जितनी सहजता से हो रहा है, उतनी ही तेजी से उसका अर्थ भी धुंधला होता जा रहा है। यह कटु सत्य है कि प्रेस का तमगा हासिल करने के लिए किसी विशेष योग्यता या प्रशिक्षण की अनिवार्यता नहीं है। परिणामस्वरूप, इस क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो पत्रकारिता को सेवा नहीं, बल्कि साधन मान बैठे हैं। प्रेस का बिल्ला लगाकर व्यक्तिगत लाभ लेना, अपने आपको वीआईपी साबित करना, सरकारी और निजी संस्थानों में विशेष व्यवहार की अपेक्षा करना,ये प्रवृत्तियां पत्रकारिता की गरिमा को चोट पहुंचा रही हैं।
सत्ता और समाज के बीच एक सेतु
पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता और समाज के बीच एक सेतु बनना है। यह सेतु तभी मजबूत रह सकता है जब उसमें सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के स्तंभ मजबूती से खड़े हों। खोजी दृष्टिकोण, तथ्यों की गहराई से जांच और बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रस्तुतीकरण,यही पत्रकारिता की आत्मा है। लेकिन जब इस आत्मा की जगह स्वार्थ, लालच और दिखावा ले लेते हैं, तो पत्रकारिता का स्वरूप विकृत हो जाता है।
प्रेस के नाम पर विज्ञापन जुटाना बना प्राथमिकता
आज यह भी देखने में आता है कि कुछ लोग प्रेस के नाम पर विज्ञापन जुटाने और आर्थिक लाभ कमाने को ही अपनी प्राथमिकता बना लेते हैं। समाचार और विज्ञापन के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। यह प्रवृत्ति न केवल पाठकों के विश्वास को कमजोर करती है, बल्कि पूरे मीडिया तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देती है। समाज को सही दिशा दिखाने वाला माध्यम जब स्वयं भटकने लगे, तो उसके दुष्परिणाम व्यापक होते हैं।
समाज को भी सजग रहना होगा
ऐसे समय में आवश्यकता है आत्ममंथन की। पत्रकारों को यह समझना होगा कि उनका दायित्व केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और सशक्त बनाना भी है। उन्हें यह तय करना होगा कि वे अपने पेशे को कितनी ईमानदारी और निष्ठा से निभा रहे हैं। वहीं, समाज को भी सजग रहना होगा और वास्तविक तथा दिखावटी पत्रकारिता के बीच अंतर समझना होगा।
केवल बधाइयों का अवसर नहीं
विश्व प्रेस दिवस केवल बधाइयों का अवसर नहीं, बल्कि संकल्प लेने का दिन है,सत्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने का, निष्पक्षता बनाए रखने का और पत्रकारिता को उसके मूल उद्देश्य से जोड़कर रखने का। जब प्रेस समाज को कुछ सार्थक देने लगेगा, तभी उसकी भूमिका वास्तव में प्रभावी और सम्माननीय बन पाएगी।


