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जिम्मेदारी से जवाब देना भी सुशासन का हिस्सा

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता केवल विकास कार्यों का मूल्यांकन नहीं करती, बल्कि उन कार्यों के संबंध में जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों द्वारा दिए गए बयानों को भी गंभीरता से सुनती है। यही कारण है कि किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के वक्तव्यों में स्पष्टता, तथ्यपरकता और जवाबदेही का होना आवश्यक माना जाता है। हाल ही में नगरीय एवं स्वायत्त शासन मंत्री द्वारा सड़कों की खराब स्थिति के लिए “अंतर्राष्ट्रीय कारणों” को जिम्मेदार ठहराने वाला बयान इसी संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सड़क निर्माण कोई अत्यंत जटिल या रहस्यमयी प्रक्रिया नहीं है। सामान्यतः इसमें पत्थर, बजरी, डामर, सीमेंट और कंक्रीट जैसी निर्माण सामग्री का उपयोग होता है। यदि वास्तव में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण किसी सामग्री की गुणवत्ता या उपलब्धता प्रभावित हुई है तो सरकार को उसके स्पष्ट तथ्य जनता के सामने रखने चाहिए। केवल “अंतर्राष्ट्रीय कारण” कह देने से न तो समस्या का समाधान होता है और न ही जनता की जिज्ञासा शांत होती है। नागरिक यह जानना चाहते हैं कि आखिर कौन से ऐसे वैश्विक कारण हैं जिनके कारण उनके शहर और कस्बों की सड़कें समय से पहले टूट रही हैं।

अटपटा कारण जनता को संतुष्ट नहीं कर सकता

यह भी ध्यान देने योग्य है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह सरकारी एजेंसियों, तकनीकी अधिकारियों और ठेकेदारों की होती है। यदि किसी सामग्री की गुणवत्ता पर संदेह है तो उसके विकल्प उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए जिन क्षेत्रों में डामर आधारित सड़कों की टिकाऊ क्षमता कम साबित हो रही है, वहां सीमेंट कंक्रीट अर्थात सीसी रोड का विकल्प अपनाया जा सकता है। देश के अनेक शहरों में लंबे समय तक टिकने वाली सीसी सड़कें बनाई जा रही हैं। ऐसे में समस्या का समाधान खोजने की अपेक्षा कारणों को बाहरी परिस्थितियों पर डाल देना जनता को संतुष्ट नहीं कर सकता।

बहानों से अधिक समाधान चाहिए

वास्तव में जनता को बहानों से अधिक समाधान चाहिए। जब नागरिक टैक्स देते हैं और सरकार विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, तब यह स्वाभाविक है कि वे सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठाएं। यदि सड़कें कुछ ही समय में उखड़ जाती हैं, गड्ढों में बदल जाती हैं या बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तो इसके लिए तकनीकी समीक्षा, गुणवत्ता परीक्षण और जवाबदेही तय होना आवश्यक है। समस्या स्वीकार करना गलत नहीं है, लेकिन उसके लिए अस्पष्ट तर्क प्रस्तुत करना निश्चित रूप से उचित नहीं कहा जा सकता।

कारणों की नहीं, सुधार की कार्ययोजना की आवश्यकता

जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के वक्तव्य केवल राजनीतिक बयान नहीं होते, वे सरकार की सोच और प्रशासनिक दृष्टिकोण का भी प्रतिबिंब होते हैं। इसलिए अपेक्षा की जाती है कि उनके उत्तर

तथ्यों पर आधारित हों और उनमें समस्या के समाधान की दिशा दिखाई दे। सड़कों की गुणवत्ता को लेकर यदि जनता चिंतित है तो उसे कारणों की नहीं, सुधार की कार्ययोजना की आवश्यकता है।

सुशासन का अर्थ केवल सड़कें बनवाना नहीं

सुशासन का अर्थ केवल सड़कें बनवाना नहीं, बल्कि उनके संबंध में जनता के प्रति ईमानदार और जिम्मेदार संवाद बनाए रखना भी है। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के जवाब भी उतने ही जिम्मेदार होने चाहिए जितनी बड़ी उनकी जिम्मेदारियां हैं। यही लोकतंत्र की भावना है और यही जनता की अपेक्षा भी।

 

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