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परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही का संकट

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। राज्य के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सुशासन की बुनियादी शर्त होती है। लेकिन जब सरकारी विभागों में गैर-राजकीय व्यक्तियों की ऑफिशियल उपस्थिति देखने को मिले, तो यह न केवल व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि कानून के शासन को भी कमजोर करती है। परिवहन विभाग में इस प्रकार की अनौपचारिक दखलंदाजी गंभीर चिंता का विषय है। जिस व्यक्ति को जो दायित्व सौंपा गया है, उसे वही व्यक्ति निभाए,यह प्रशासनिक अनुशासन का मूल सिद्धांत है। इसके विपरीत, निजी व्यक्तियों को सरकारी कार्यों में शामिल करना सीधे तौर पर गोपनीयता कानूनों का उल्लंघन है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला कारक भी।

बीकानेर संभाग में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। आमजन के बीच यह धारणा बन चुकी है कि विभाग में लालफीताशाही, ढिलाई और अनियमितता सामान्य बात हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि विभाग एक चिकना घड़ा प्रतीत होता है, जिस पर नियम-कानूनों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह केवल प्रशासनिक अक्षमता का मामला नहीं, बल्कि एक गहरे संस्थागत संकट का संकेत है।

सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत

सबसे चिंताजनक पहलू है,अवैध वाहनों का बढ़ता जाल। बीकानेर आरटीओ रीजन में अवैध वाहनों का संचालन न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह राज्य के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है। बिना परमिट और टैक्स के चलने वाले ये वाहन सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगा रहे हैं। इससे भी अधिक गंभीर प्रभाव यह है कि राज्य की सार्वजनिक परिवहन सेवा, विशेषकर रोडवेज, बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जहां एक ओर रोडवेज घाटे में जा रही है, वहीं दूसरी ओर अवैध परिवहन फल-फूल रहा है—यह विरोधाभास अपने आप में व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है।

विभागीय भ्रष्टाचार की भूमिका

इस पूरी स्थिति के पीछे विभागीय भ्रष्टाचार की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि नियमों का पालन सख्ती से हो और निगरानी तंत्र सक्रिय हो, तो अवैध गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं बचता। लेकिन जब व्यवस्था ही समझौते की राह पर चल पड़े, तो कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।

परिवहन विभाग में जवाबदेही तय हो

अब समय आ गया है कि इस स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाए। परिवहन विभाग में जवाबदेही तय हो, गैर-राजकीय हस्तक्षेप पर रोक लगे और अवैध वाहनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, तकनीकी साधनों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से निगरानी को मजबूत किया जाए।

अव्यवस्था न केवल प्रशासनिक ढांचे को खोखला करेगी

अव्यवस्था प्रशासनिक ढांचे को खोखला करेगी

यदि शासन वास्तव में राजधर्म निभाने के लिए प्रतिबद्ध है, तो उसे इस दिशा में ठोस और दृश्यमान कदम उठाने होंगे। अन्यथा, यह अव्यवस्था न केवल प्रशासनिक ढांचे को खोखला करेगी, बल्कि जनता का विश्वास भी पूरी तरह समाप्त कर देगी।

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