Loading Now

updates

आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा : मानवता के साथ अपराध

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)।   राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम अर्थात आरजीएचएस केवल एक सरकारी स्वास्थ्य योजना भर नहीं है, बल्कि यह लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की सामूहिक संवेदनाओं से जुड़ी व्यवस्था है। इस योजना के लिए कार्मिक अपने वेतन से नियमित अंशदान देते हैं ताकि बीमारी और संकट की स्थिति में जरूरतमंदों को समय पर उपचार मिल सके। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह व्यवस्था परस्पर सहयोग और मानवीय सेवा की भावना पर आधारित है। भारत जैसे देश में जहां बीमारों की सहायता को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है, वहां ऐसी योजना में फर्जीवाड़ा कर राशि उठाना केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि मानवता के साथ क्रूर मजाक है।

हमारे समाज में रोगियों की सेवा को सदैव महान कार्य माना गया है। लोग अस्पताल बनवाते हैं, निशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित करते हैं, गरीब मरीजों को दवाइयां उपलब्ध करवाते हैं और अनेक सामाजिक संस्थाएं उपचार के लिए आर्थिक सहायता देती हैं। चिकित्सा सेवा को धर्म और करुणा से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे वातावरण में यदि कोई व्यक्ति, अस्पताल या गिरोह फर्जी बिल, झूठे उपचार या कागजी मरीजों के माध्यम से आरजीएचएस जैसी योजना को लूटने का प्रयास करता है तो वह वास्तव में समाज की नैतिकता को चोट पहुंचाता है।

भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव वास्तविक मरीजों पर

इस प्रकार के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव उन वास्तविक मरीजों पर पड़ता है जिन्हें समय पर उपचार की आवश्यकता होती है। योजनाओं का बजट सीमित होता है। जब फर्जी दावों के माध्यम से राशि निकाल ली जाती है तब वास्तविक जरूरतमंदों को भुगतान में देरी, उपचार में बाधा और कई बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इससे सरकारी योजनाओं के प्रति जनता का विश्वास भी कमजोर होता है। ईमानदारी से अंशदान देने वाले कार्मिकों को यह महसूस होने लगता है कि उनकी मेहनत की कमाई कुछ भ्रष्ट लोग अनुचित तरीके से हड़प रहे हैं।

यह भी चिंताजनक है कि ऐसे मामलों में कई बार संगठित तरीके से नेटवर्क काम करते हैं। कुछ निजी अस्पताल, दलाल और संबंधित लोग मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर कठोर अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में जनहित की योजनाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी और मजबूत हो

सरकार को चाहिए कि आरजीएचएस में पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जाए। प्रत्येक उपचार, जांच और भुगतान का डिजिटल सत्यापन हो। संदिग्ध दावों की नियमित ऑडिट करवाई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। केवल आर्थिक दंड पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों को कठोर सजा देकर स्पष्ट संदेश देना आवश्यक है कि रोगियों के अधिकारों पर डाका डालने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ेगा

समाज को भी समझना होगा कि स्वास्थ्य योजनाएं केवल सरकारी खजाने की व्यवस्था नहीं बल्कि सामूहिक विश्वास की पूंजी हैं। यदि इस विश्वास को छल और लालच से तोड़ा जाएगा तो अंततः नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ेगा। इसलिए आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा रोकना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की रक्षा का भी प्रश्न है।

Share this content:

You May Have Missed