NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। आस्था और भक्तों का कुंभ लगने का केंद्र होने के बावजूद कोडमदेसर भैरव मेला इस बार भी अव्यवस्थाओं और समस्याओं से जूझ रहा है। 4 और 5 सितंबर को लगने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, लेकिन मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाएँ प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रही हैं। मंदिर के पुजारी परिवार के रामेश्वर लाल गहलोत ने बताया कि बरसात के चलते मंदिर परिसर और मार्ग कीचड़ से पटे पड़े हैं। श्रद्धालुओं के लिए पैदल चलना भी मुश्किल है।
गहलोत ने बताया कि दोपहिया, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन अवरुद्ध हो जाता है। भारी वाहनों के लिए यह मार्ग प्रतिबंधित होने के बावजूद, टोल टैक्स बचाने के लिए ट्रक और ट्रेलर इसी रास्ते से गुजरते हैं जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। मंदिर परिसर में चढ़ावे के रूप में आने वाला तेल, सिंदूर और फूल-मालाएँ अगले दिन अपशिष्ट के रूप में निकलते हैं जो प्रतिदिन की स्तिथि रहती और मेले दिन यह स्तिथि कई होती है जिन्हें मंदिर के बाहर कच्ची ज़मीन पर डाल दिया जाता है। प्रशासन की ओर से इनके नियमित निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण तालाब का एक हिस्सा कचरे और गंदगी से भर चुका है।
संकुचित हो गया है तालाब का कैचमेंट एरिया

गहलोत ने बताया कि तालाब का कैचमेंट एरिया भी कब्जों की वजह से संकुचित हो गया है, जिससे भरपूर बारिश के बाद भी तालाब आधा खाली रह जाता है और गर्मियों में पूरी तरह सूख जाता है। मंदिर के आसपास अस्थाई दुकानें पंचायत की अनुमति से इतनी नज़दीक लगा दी जाती हैं कि श्रद्धालुओं के मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। संकरे रास्तों पर श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
महिला भक्तों की पहुंच से दूर हैं शौचालय

पुजारी परिवार का कहना है कि पंचायत द्वारा शौचालय तो बनाए गए हैं, लेकिन वे मंदिर से दूर होने के कारण महिलाओं को जानकारी ही नहीं मिल पाती और उन्हें बहुत कठिनाई होती है। शौचालयों में गदंगी होने से अन्य भक्तों को भी इनके इस्तेमाल में परेशानी हो रही है। नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं होने से शौचालयों का इस्तेमाल किया जाना कठिन हो गया है। यहां गंदगी फैलने से माहौल अस्वच्छ हो जाता है। इन समस्याओं के बीच पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर अपनी योजनाएँ सामने रखी हैं।
भारी वाहनों के प्रवेश पर है प्रतिबंधित

गजनेर थानाधिकारी सुभाष गोदारा ने बताया कि मंदिर परिसर से बाहर बस और बड़े वाहनों के लिए अलग से पार्किंग बनाई गई है। पूरे गांव में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों को पूर्णतया प्रतिबंधित किया गया है। मंदिर परिसर से 500 मीटर दायरे तक किसी भी वाहन का प्रवेश वर्जित रहेगा और केवल पदयात्री ही जा सकेंगे। पुलिस बल लगातार निगरानी रखेगा और राजमार्ग पर पदयात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष गश्त का इंतज़ाम किया गया है।
गंदगी और कीचड़ को तुरंत हटाया जाए
पुजारी परिवार और श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन से अपील की है कि गंदगी और कीचड़ को तुरंत हटाया जाए, मार्गों पर मिट्टी डाली जाए और अस्थाई दुकानों को थोड़ी दूरी पर स्थापित किया जाए ताकि बाबा भैरव का मेला श्रद्धा और स्वच्छता के साथ संपन्न हो सके। आस्था के इस शताब्दियों पुराने पर्व की गरिमा तभी बनी रह सकती है जब प्रशासन दिखावे की बजाय ज़मीनी स्तर पर ठोस काम करे।


