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चैत्र की बेमौसम बरसात से किसानों की फसलों को नुकसान

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। चैत्र माह में हुई बेमौसम बारिश ने एक बार फिर खेती की अनिश्चितता और किसानों की विवशता को उजागर कर दिया है। इस समय रबी की फसलें,सरसों, चना, गेहूं, जीरा और ईसबगोल,अपनी पकाव अवस्था में होती हैं। यह वह चरण है जब किसान पूरे सीजन की मेहनत के फल की उम्मीद करता है। लेकिन अचानक आई बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि ने इन तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे बड़े क्षेत्र के किसान आर्थिक संकट में घिर गए हैं।

रबी फसलों के लिए यह समय अत्यंत संवेदनशील होता है। गेहूं में दाने भरने की प्रक्रिया चल रही होती है, सरसों और चने की फलियां पक चुकी होती हैं, जबकि जीरा और ईसबगोल जैसी नकदी फसलें कटाई के लिए तैयार रहती हैं। ऐसे में बारिश से फसलों का गिरना, दानों का काला पड़ना और गुणवत्ता में गिरावट आना स्वाभाविक है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है, क्योंकि बाजार में खराब गुणवत्ता के उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

बीमा क्लेम की प्रक्रिया जटिल और धीमी

इस संकट की घड़ी में फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है। परंतु वास्तविकता यह है कि अक्सर बीमा क्लेम की प्रक्रिया जटिल और धीमी होती है, जिससे किसानों को समय पर राहत नहीं मिल पाती। कई बार सर्वेक्षण में पारदर्शिता की कमी और आंकड़ों की गड़बड़ी के कारण पात्र किसानों को भी पूरा मुआवजा नहीं मिल पाता।

सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस बार फसल नुकसान का आकलन निष्पक्ष और शीघ्रता से किया जाए। आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट इमेजिंग का उपयोग कर वास्तविक नुकसान का सही अनुमान लगाया जा सकता है। साथ ही, बीमा कंपनियों को निर्देशित किया जाए कि वे दावों का निपटान समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से करें।

तत्काल राहत पैकेज की हो घोषणा

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार को भी तत्काल राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए ताकि प्रभावित किसानों को तात्कालिक आर्थिक सहायता मिल सके। सहकारी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को भी ऋण पुनर्गठन और ब्याज में राहत देने जैसे कदम उठाने चाहिए। यह आवश्यक है कि कृषि क्षेत्र को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक सक्षम बनाया जाए। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ऐसी असामयिक घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए दीर्घकालिक नीतियों और मजबूत सुरक्षा तंत्र की जरूरत है।

फिलहाल, सबसे बड़ी प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि प्रभावित किसानों को जल्द और न्यायपूर्ण राहत मिले, ताकि उनका विश्वास व्यवस्था में बना रहे और वे अगली फसल के लिए फिर से खड़े हो सकें।

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