MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर शहर की सबसे पुरानी और जटिल समस्याओं में यदि किसी एक समस्या का नाम लिया जाए तो वह निस्संदेह शहर के विभिन्न रेल फाटक हैं। दशकों से ये रेल फाटक आमजन के लिए परेशानी, समय की बर्बादी और यातायात अव्यवस्था का पर्याय बने हुए हैं। चुनाव आते रहे, वादे किए जाते रहे, योजनाएं बनती और फाइलों में दबती रहीं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। अब जब प्रशासन ने रेल फाटकों के नीचे अंडरपास निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है, तो यह केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि बीकानेर की यातायात व्यवस्था में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत है।
रेल फाटक किसी भी शहर के विकास में बाधक नहीं होने चाहिए, लेकिन बीकानेर में ये लंबे समय से विकास की गति को रोकने वाले अवरोध बन चुके थे। दिन में कई बार फाटक बंद होने से हजारों लोगों को इंतजार करना पड़ता था। नौकरीपेशा लोगों की समयबद्धता प्रभावित होती थी, विद्यार्थियों को परेशानी होती थी और व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता था। कई बार तो एंबुलेंस, अग्निशमन वाहन और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी फाटक बंद होने के कारण विलंब का शिकार होती थीं। यह स्थिति केवल असुविधा नहीं बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी थी।
स्थायी समाधान का दृढ़ निश्चय
सोमवार से अंडरपास निर्माण कार्य का आरंभ होना इस बात का संकेत है कि प्रशासन ने समस्या के स्थायी समाधान का दृढ़ निश्चय कर लिया है। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्षों से जिस विषय पर केवल चर्चा और राजनीति होती रही, उस पर अब धरातल पर काम दिखाई देने लगा है। किसी भी शहर के विकास का आकलन केवल नई इमारतों या चौड़ी सड़कों से नहीं होता, बल्कि उन समस्याओं के समाधान से होता है जो प्रतिदिन लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं।
भविष्य की स्थायी सुविधा के लिए स्वीकार
निश्चित रूप से निर्माण कार्य के दौरान नागरिकों को कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। यातायात मार्गों में बदलाव, धूल, शोर और आवागमन में अस्थायी कठिनाइयां आएंगी। लेकिन यह वह असुविधा है जिसे भविष्य की स्थायी सुविधा के लिए स्वीकार करना होगा। बड़े परिवर्तन हमेशा कुछ समय की चुनौतियों के साथ आते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरा हो।
यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार
अंडरपास बनने के बाद बीकानेर की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। लोगों को फाटक खुलने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी, यात्रा समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। सबसे बड़ी बात यह होगी कि शहर की गति किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर थमेगी नहीं।
कभी रेल फाटक पर खड़े रहकर मिनटों नहीं, बल्कि कई बार घंटों इंतजार करना
परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं
बीकानेरवासियों की मजबूरी हुआ करता था। अब परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होती है तो संभव है कि आने वाले वर्षों में रेल फाटक पर खड़े होकर उसके खुलने का इंतजार करना वास्तव में एक “वीआईपी घटना” बन जाए। बीकानेर लंबे समय से जिस समाधान की प्रतीक्षा कर रहा था, उसकी शुरुआत हो चुकी है। अब आवश्यकता केवल इस बात की है कि यह संकल्प समयबद्धता, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ अपनी मंजिल तक पहुंचे।


