‘पीबीएम सुधारो जनआंदोलन‘ के तहत डॉ. कल्ला और सियाग ने उठाई 10 सूत्रीय मांगें
प्रसूताओं की किडनी खराब होने के मामले में मांगा 25 लाख का मुआवजा
NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। उत्तर-पश्चिम राजस्थान के सबसे बड़े पीबीएम (प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल) अस्पताल में बदइंतजामी और मरीजों की परेशानियों को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए चल रहे “पीबीएम सुधारो जनआंदोलन” को तेज करते हुए अब केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाई है।
पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला और बीकानेर देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने केन्द्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को एक 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर अस्पताल में सुधार की मांग की है। कांग्रेस ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो जिले भर में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी से जनता में रोष डॉ. बी.डी. कल्ला ने बताया कि कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था ठप है, दवाइयों की भारी कमी है, उपकरण धूल फांक रहे हैं और मरीजों के साथ अभद्रता की जा रही है।
ज्ञापन की मुख्य 5 बड़ी बातें (Highlights)
मुआवजे की मांग: चिकित्सकीय लापरवाही से जिन प्रसूता महिलाओं की किडनी खराब हुई है, उसकी जांच हो और पीड़ितों को 25 लाख रुपये का मुआवजा मिले। भ्रष्टाचार की जांच: पीबीएम अस्पताल में फैले भ्रष्टाचार की किसी बाहरी और स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए।नई विंग्स चालू हों सीएम मूंधड़ा मेडिसिन विंग और वर्षों से तैयार पड़ी जनाना (गायनिक) विंग को तुरंत शुरू किया जाए। डॉक्टरों की हाजिरी ड्यूटी के समय सभी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अस्पताल में अनिवार्य उपस्थिति तय की जाए। जांच और दवाइयां: सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी मशीनें तुरंत ठीक हों और सभी जीवनरक्षक दवाइयां अस्पताल में फ्री मिलें।
आगे क्या?
कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है कि अस्पताल का यह रवैया आम जनता के स्वास्थ्य के अधिकार के साथ सीधा खिलवाड़ है। यदि प्रशासन और सरकार ने तुरंत कोई ठोस एक्शन नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में कांग्रेस एक बड़ा जिला स्तरीय जनआंदोलन खड़ा करेगी।


