MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर शहर की यातायात व्यवस्था लंबे समय से कई चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन शाम ढलते ही कोटगेट से लेकर शार्दूल सिंह सर्कल और स्टेशन रोड तक जिस प्रकार की स्थिति बनती है, वह अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गई है बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। शाम सात बजे के बाद कोटगेट, प्रेमजी प्वाइंट, रतन बिहारी पार्क, बड़े हनुमान मंदिर, शार्दूल सिंह सर्कल और स्टेशन रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर फल और सब्जी के ठेलों का व्यापक अतिक्रमण तथा अव्यवस्थित यातायात आम नागरिकों के लिए रोजाना की परेशानी बन चुका है।
इन मार्गों की विशेषता यह है कि ये शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवागमन केंद्र हैं। रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की बड़ी संख्या प्रतिदिन इन रास्तों का उपयोग करती है। ऐसे में सड़क के बड़े हिस्से पर अस्थायी ठेलों का कब्जा हो जाने से यातायात की क्षमता स्वतः ही कम हो जाती है। परिणामस्वरूप थोड़े से वाहनों का दबाव भी लंबे जाम का कारण बन जाता है। कई बार एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भी रास्ता बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
रोजगार का अधिकार
यह कहना भी उचित नहीं होगा कि समस्या केवल ठेला संचालकों की है। बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए यह व्यवसाय करते हैं और उन्हें भी रोजगार का अधिकार है। वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या किसी भी प्रकार के रोजगार के नाम पर सार्वजनिक सड़कों को स्थायी बाजार में बदला जा सकता है? यदि प्रशासन ने वैकल्पिक स्थानों, निर्धारित वेंडिंग जोन या व्यवस्थित बाजारों की व्यवस्था नहीं की है तो यह उसकी योजना और क्रियान्वयन की विफलता भी है।
पारदर्शी जांच और जवाबदेही आवश्यक
सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि यह सब कुछ प्रशासन और पुलिस की जानकारी के बिना नहीं होता। रोजाना एक ही समय पर एक ही स्थान पर अतिक्रमण होता है, यातायात जाम लगता है और नागरिक परेशान होते हैं। यदि समस्या लगातार बनी हुई है तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि कार्रवाई क्यों नहीं होती। ऐसे हालात प्रशासन की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति या विभाग पर बिना प्रमाण भ्रष्टाचार के आरोप लगाना उचित नहीं है, लेकिन जब समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो पारदर्शी जांच और जवाबदेही आवश्यक हो जाती है।
प्रमुख मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखना चाहिए
शहर को न तो अतिक्रमण मुक्त बनाने के नाम पर गरीबों के रोजगार पर चोट पहुंचानी चाहिए और न ही रोजगार के नाम पर सड़कों को जाम की भेंट चढ़ाना चाहिए। आवश्यकता संतुलित समाधान की है। नगर निगम, यातायात पुलिस और जिला प्रशासन को संयुक्त अभियान चलाकर निर्धारित वेंडिंग जोन विकसित करने चाहिए, प्रमुख मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखना चाहिए तथा यातायात नियमों का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
सुशासन की असली कसौटी
बीकानेर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सड़कों का उद्देश्य यातायात है, बाजार लगाना नहीं। यदि प्रशासन समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोजता तो बढ़ती आबादी और वाहनों के साथ यह संकट और विकराल होता जाएगा। नागरिकों को सुविधा, व्यापारियों को अवसर और शहर को सुव्यवस्थित यातायातइन तीनों के बीच संतुलन स्थापित करना ही सुशासन की असली कसौटी है।


