MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाओं का ठीकरा केवल डॉक्टर्स के सिर फोड़ देना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। इलाज करना और अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता सुनिश्चित करना दो अलग-अलग विषय हैं। डॉक्टर का दायित्व मरीज की बीमारी का उपचार करना है, जबकि अस्पताल में भवन, उपकरण, दवाइयां, सफाई, स्टोर व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन सुनिश्चित करना प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी होती है। इन दोनों भूमिकाओं को एक-दूसरे में मिलाकर देखने से वास्तविक समस्याएं कभी सामने नहीं आ पाएंगी।
सरकारी अस्पतालों में अक्सर देखने को मिलता है कि छतों से प्लास्टर गिर रहा है, वार्डों में पंखे बंद पड़े हैं, दवाइयों की कमी बनी रहती है, सिरिंज और केनुला जैसी बुनियादी वस्तुएं तक समय पर उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे हालात में डॉक्टरों को दोष देना आसान जरूर है, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि इन व्यवस्थागत खामियों पर उनका प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होता। अस्पतालों में रिलीफ सोसायटी, प्रशासनिक अधिकारी, लेखाधिकारी, स्टोर शाखा और अन्य प्रबंधन इकाइयां इसी उद्देश्य से बनाई जाती हैं कि अस्पताल की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों।
प्रशासनिक स्तर पर तय होनी चाहिए विफलताओं की जिम्मेदारी
जब किसी अस्पताल में संभागीय आयुक्त जैसे वरिष्ठ अधिकारी रिलीफ सोसायटी के अध्यक्ष हों, वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों के लिए अलग अधिकारी नियुक्त हों, तब व्यवस्थागत विफलताओं की जिम्मेदारी भी प्रशासनिक स्तर पर तय होनी चाहिए। यदि दवाइयों की खरीद समय पर नहीं हुई, भवन की मरम्मत नहीं हुई या उपकरण अनुपलब्ध हैं, तो यह प्रशासनिक कमजोरी है, न कि इलाज कर रहे डॉक्टर की व्यक्तिगत विफलता। दुर्भाग्य से अक्सर जन आक्रोश का सबसे आसान लक्ष्य डॉक्टर बन जाते हैं।
डॉक्टरों को मिलना चाहिए विवादों से मुक्त वातावरण
यह भी सच है कि आज सरकारी अस्पतालों में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के बावजूद डॉक्टर लगातार काम कर रहे हैं। कई बार उन्हें एक साथ सैकड़ों मरीज देखने पड़ते हैं। ऐसे में यदि वे इलाज छोड़कर प्रशासनिक उलझनों में फंस जाएंगे तो सबसे अधिक नुकसान मरीजों का ही होगा। डॉक्टरों को भय, दबाव और अनावश्यक विवादों से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए ताकि वे पूरी निष्ठा और एकाग्रता से चिकित्सा कार्य कर सकें।
जांच और कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए
इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही समाप्त हो जाए। यदि किसी डॉक्टर द्वारा लापरवाही या अमानवीय व्यवहार किया जाता है तो उसकी जांच और कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। लेकिन हर अव्यवस्था का कारण डॉक्टरों को मान लेना उचित नहीं है। व्यवस्था की कमियों और चिकित्सा सेवा के बीच स्पष्ट अंतर समझना होगा।
आमजन को मिले बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर गंभीरता से काम करे। भवनों की मरम्मत, उपकरणों की उपलब्धता, पर्याप्त दवाइयां और आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित हों। वहीं डॉक्टरों को केवल मरीजों के उपचार पर केंद्रित रहने दिया जाए। जब प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाएगा और डॉक्टर निर्भय होकर इलाज करेंगे, तभी आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।


