Loading Now

updates

अश्व पालन में नवाचार करें अश्‍व पालक- डॉ हेमंत दाधीच

Horse breeders should innovate in horse rearing - Dr. Hemant Dadhich

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)   वेटरनरी कॉलेज बीकानेर के डीन डॉ. हेमंत दाधीच ने अश्‍व पालकों से आव्‍हान किया कि वे अश्व पालन में नवाचार करें। डॉ दाधीच गुरुवार को राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र  बीकानेर में अश्व पालन के चार दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को मुख्‍य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

उन्‍होंने कहा कि घोड़ों का महत्व पुरातन काल से आज तक कायम है। घोड़ा समाज में एक विशिष्ठ स्थान रखता है एवं इसको बढ़ावा देने के लिये वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर एवं अश्व अनुसंधान केंद्र बीकानेर अलग अलग संस्‍थान नहीं हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्र के प्रभागाध्यक्ष डॉ. एस. सी. मेहता ने अश्‍व पालको से कहा की वे अश्व पालन को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी अश्व -स्पर्धाओं, तांगा रेस, रेडी रेस, घोड़ों के साथ बैलों की रेस आदि को बढ़ावा दें एवं स्वदेशी घोड़ों के लिए रेस कोर्स एवं अन्य सुविधाओं का निर्माण करें एवं हर छोटे बड़े शहर में हॉर्स राइडिंग स्कूल प्रारम्भ करने का प्रयास करें।

घोड़ों को बढ़ावा देने के लिए बनाएं संगठन

डॉ. मेहता ने हर जिले में घोड़ों को बढ़ावा देने के लिए संघठन बनाने का भी आह्वान भी किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजस्थान, पंजाब, दिल्ली एवं उत्तरप्रदेश के कुल 27 अश्व पालकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में किसानों को अश्व पालन, अश्व पोषण प्रबंधन, अश्व प्रजनन और अश्व प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया। यह कार्यक्रम पूर्णतया किसानों के द्वारा स्व-पोषित था।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ रमेश कुमार देदड, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ तिरुमला राव ताल्लुरी, वैज्ञानिक डॉ मुहम्मद कुट्टी, फार्म प्रबंधक डॉ जितेन्द्र सिंह एवं एस एन पासवान की प्रमुख भूमिका रही।

 

Share this content:

You May Have Missed