संसाधनों की कमी के बावजूद परिवहन विभाग संभाल रहा 400 किमी का दायरा
MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर संभाग के प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में सब इंस्पेक्टर के सभी 33 पद वर्तमान में खाली पड़े हैं। इसके अलावा आठ स्वीकृत जिला परिवहन अधिकारियों में से केवल चार ही पद भरे हुए हैं, जबकि 27 परिवहन निरीक्षकों के स्थान पर मात्र 20 ही कार्यरत हैं। अधिकारी-कर्मचारियों की इस कमी के चलते आम वाहन चालकों को काफी परेशान होना पड़ रहा है।
दूसरी ओर संसाधनों और कर्मचारियों की भारी कमी के बावजूद आरटीओ कार्यालय अपने विस्तृत क्षेत्र 400 किलोमीटर में परिवहन व्यवस्थाओं को संभालने की चुनौती से जूझ रहा है। विभाग सीमित स्टाफ के साथ यातायात व्यवस्था, राजस्व वसूली और अवैध परिवहन गतिविधियों पर नियंत्रण का प्रयास कर रहा है। विभाग में स्वीकृत पदों के मुकाबले काफी कम अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसी स्थिति में उपलब्ध स्टाफ पर कार्य का दबाव बढ़ गया है। परिवहन विभाग के सामने एक और चुनौती राष्ट्रीय राजमार्गों के ट्रैफिक पैटर्न में आए बदलाव के कारण उत्पन्न हुई है।
दौड़ते वाहनों को रोकना हुआ लगभग असंभव
अब नेशनल हाईवे पर चलने वाला लगभग 90 प्रतिशत ट्रैफिक एक्सप्रेस-वे और भारतमाला परियोजना के मार्गों पर शिफ्ट हो गया है। इसके बावजूद विभाग से भारी-भरकम राजस्व लक्ष्यों की पूर्ति की अपेक्षा की जाती है, जिसे अधिकारी अव्यावहारिक मानते हैं। एक्सप्रेस-वे पर तेज गति से दौड़ते वाहनों को रोकना या उनका पीछा करना भी विभाग के लिए लगभग असंभव हो गया है। हालांकि इन मार्गों पर अत्याधुनिक कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं, जो वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन कर बीमा, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र जैसी जानकारी तुरंत उपलब्ध करा सकते हैं।
संगठित अवैध नेटवर्क से जूझना
लेकिन कई बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालक नंबर प्लेट बदल लेते हैं या बिना नंबर प्लेट के ही वाहन चलाते हैं, जिससे कार्रवाई करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा विभाग को ओवरलोड माफिया, ड्रग माफिया, बजरी माफिया, अवैध बस संचालन तथा खनन से जुड़े अवैध परिवहन जैसे कई संगठित अवैध नेटवर्क से भी जूझना पड़ता है। सीमित संसाधनों के बीच इन गतिविधियों पर नियंत्रण रखना और साथ ही तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को अपडेट रखना भी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। राजस्व वसूली भी विभाग के लिए आसान कार्य नहीं है।
सीधे टैक्स काटने की व्यवस्था हो लागू
लैंड रेवेन्यू एक्ट के प्रावधानों के तहत टैक्स वसूली आरटीओ के अधिकार क्षेत्र में आती है, लेकिन डिफॉल्टरों से टैक्स वसूलना अक्सर कठिन साबित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फास्टैग की तर्ज पर डिफॉल्टर वाहन मालिकों के बैंक खातों से सीधे टैक्स काटने की व्यवस्था लागू की जाए तो विभाग को काफी राहत मिल सकती है और विवाद भी कम होंगे। परिवहन विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वाहन अपनी गतिशीलता के कारण कई बार अपराध का माध्यम बन जाते हैं।
आरटीओ के पास हो वाहन पंजीकरण की जिम्मेदारी
यदि वाहन स्थिर हो तो उसे पकड़ना आसान होता है, लेकिन चलते वाहन का पता लगाना और अपराध के बाद उसे ट्रेस करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। इसी संदर्भ में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा वाहन पंजीकरण व्यवस्था का भी उठाया जा रहा है। पहले वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया सीधे आरटीओ कार्यालयों के माध्यम से होती थी, लेकिन अब यह कार्य काफी हद तक वाहन डीलरों के माध्यम से होने लगा है। आलोचकों का कहना है कि इससे वाहन पंजीकरण प्रक्रिया तो आसान हुई है, लेकिन नियंत्रण व्यवस्था कमजोर पड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। उनका मानना है कि वाहन पंजीकरण की जिम्मेदारी फिर से आरटीओ के पास ही होनी चाहिए ताकि प्रणाली पर प्रभावी नियंत्रण कायम रह सके।
इनका कहना है
स्टाफ की कमी है लेकिन क्षेत्र में समुचित और व्यापक प्रबंध किए हुए हैं। अवैध और ओवरलोड के विरुद्ध विभाग सक्रियता से कार्य करने को संकल्पबद्ध है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार निर्धारित लक्ष्य पूर्ण करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अनिल पंड्या
आरटीओ बीकानेर


