अस्मत अमीन सभागार में गजल संग्रह लम्स का हुआ विमोचन
NEERAJJOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। केंद्रीय साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सदस्य डॉ. बृजरतन जोशी ने कहा कि माहिर बीकानेरी की गज़लें अवाम को संवेदना के स्तर पर प्रभावित करती हैं क्योंकि इनकी गज़लें समसामयिक विषयों पर वैचारिक धरातल तैयार करती हैं।
डॉ. जोशी सोमवार को अस्मत अमीन सभागार में बीकानेर के वरिष्ठ शायर गुलाम मोहियूद्दीन माहिर की हाल ही प्रकाशित कृति लम्स के विमोचन समारोह की अध्यक्षता करते हुए आपने विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा कि माहिर की ग़ज़लों में आम आदमी की पीड़ा बेबसी और तकलीफें प्रकट होती है।
सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी बीकानेर की ओर से आयोजित इस विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि शायर रवि शुक्ला ने कहा कि गुलाम मोहियूद्दीन माहिर की गजलों को पढ़कर लगता है कि आप इंसानियत को गहराई तक बेहतर समझ सकते हैं तभी तो इनके अशआर पढ़कर आम आदमी आश्चर्यचकित रह जाता है कि गूढ़ बातों को कितनी सहजता से संप्रेषित कर देते हैं संप्रेषणीयता का यह गुण माहिर को दीगर शायरों से अलग करता है।
माहिर की गजलों में झलकता है सूफीवाद
विशिष्ट अतिथि मुफ्ती सद्दाम हुसैन कासमी ने कहा कि माहिर की गजलों में सूफीवाद झलकता है और आप सही अर्थों में मानवता को प्रतिष्ठित करने वाले बेजोड़ शायर हैं। विशिष्ट अतिथि जीत सिंह ने कहा कि गुलाम मोहियूद्दीन माहिर की शायरी में रिवायत और आधुनिक बोध का का अनूठा संगम है। सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी बीकानेर के अध्यक्ष नदीम अहमद नदीम ने कहा कि माहिर अपने दादा हजरत बेदिल और पिता मोहम्मद अयूब सालिक के साहित्यिक संस्कारों को आत्मसात किया नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं।
लम्स पर पत्र वाचन युवा साहित्यकार संजय जनागल ने किया। कार्यक्रम में इरशाद अज़ीज़, संजय आचार्य वरुण, अब्दुल जब्बार जज्बी, अस्मत अमीन, तस्नीम बानों, विजय शर्मा, प्रदीप भटनागर, संजय पुरोहित, आत्माराम भाटी, दयानंद शर्मा, डॉ. सीमा भाटी, शिवनाम सिंह, सी ए सुधीश शर्मा, आदित्य शर्मा, नीतू ढल्ला, सुषमा गहलोत, घनश्याम गहलोत, इमरोज़ नदीम, विजय सिंह राठौर, मोहम्मद शकील गौरी आदि मौजूद रहे। संचालन मुफ्ती सद्दाम हुसैन कासमी और अरमान नदीम ने किया।


