नीरज जोशी, बीकानेर, (समाचार सेवा)। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) बीकानेर को ऊँट के स्टेम सेल आधारित थनैला रोग उपचार संबंधी अनुसंधान करने की परियोजना को स्वीकृति मिली है। परियोजना के अंतर्गत ऊँट के विभिन्न ऊतकों से मेसेनकाइमल स्टेम सेल्स (MSCs) प्राप्त कर उनकी विशेषताओं का अध्ययन किया जाएगा।
गुरुवार को एनआरसीसी परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में केन्द्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि स्टेम सेल आधारित यह अनुसंधान एंटीबायोटिक के वैकल्पिक उपचार की संभावनाओं की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में थनैला रोग से प्रतिवर्ष 13 हजार करोड़ का नुकसान होता है। इस परियोजना की सफलता पर थनैला रोग के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिल सकेगी।
भविष्य में थनैला रोग के प्रभावी एवं सुरक्षित वैकल्पिक उपचार की संभावना विकसित होती है तो इससे ऊँटनी के स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन को बेहतर बनाए रखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्तमान में थनैला रोग के उपचार में एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) की चुनौती बढ़ रही है।
प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) बीकानेर के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया, परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. रतन कुमार चौधरी, डॉ. राकेश रंजन, अखिल ठुकराल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, डॉ. श्रीशैलम, वैज्ञानिक उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता का संचालन केन्द्र के मुख्य तकनीकी अधिकारी नेमीचंद बारासा द्वारा किया गया।