MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। लोकतंत्र केवल विधानसभाओं और संसद तक सीमित व्यवस्था नहीं है, बल्कि उसकी वास्तविक ताकत गांवों और स्थानीय निकायों में निहित होती है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में ग्राम पंचायतें सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती हैं, क्योंकि यही वह मंच है जहां आम नागरिक अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को सीधे जनप्रतिनिधियों के सामने रख सकता है। ऐसे में पंचायत चुनावों को समय पर नहीं करवाना लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत माना जाना चाहिए।
राजस्थान में पंचायत चुनावों को टालने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि जनता के विश्वास, सहभागिता और अधिकारों का प्रतीक भी होते हैं। जब पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद नई पंचायतों का गठन नहीं होता, तब गांवों में प्रशासनिक जवाबदेही कमजोर पड़ जाती है। नियुक्त प्रशासकों या अधिकारियों के भरोसे ग्रामीण विकास की व्यवस्था चलाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता।
आम आदमी की सबसे करीब की सरकार
ग्राम पंचायतें आम आदमी की सबसे करीब की सरकार होती हैं। गांव की सड़क, पानी, सफाई, बिजली, आवास, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, मनरेगा और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं का समाधान पंचायत स्तर पर ही संभव होता है। चुने हुए प्रतिनिधि जनता के बीच रहते हैं और उनके प्रति जवाबदेह भी होते हैं, जबकि प्रशासनिक नियुक्तियां इस भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव को कभी पूरा नहीं कर सकतीं। यही कारण है कि संविधान के 73वें संशोधन के माध्यम से पंचायत राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया था ताकि गांवों में लोकतंत्र मजबूत हो सके।
लोकतंत्र में समयबद्ध चुनाव अत्यंत आवश्यक
चुनाव टालने के पीछे सरकार चाहे प्रशासनिक, राजनीतिक या तकनीकी कारण बताए, लेकिन यह भी सच है कि लोकतंत्र में समयबद्ध चुनाव अत्यंत आवश्यक होते हैं। यदि चुनाव समय पर नहीं होते तो जनता में यह संदेश जाता है कि सरकारें सुविधानुसार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा सकती हैं। यह प्रवृत्ति भविष्य के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है। लोकतंत्र की मजबूती का अर्थ यही है कि सत्ता का हस्तांतरण तय समय पर और जनता की भागीदारी से हो।
सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनाव सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी का बड़ा माध्यम भी होते हैं। महिलाएं, युवा, अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्ग पंचायतों के माध्यम से नेतृत्व में भागीदारी प्राप्त करते हैं। चुनाव टलने से यह प्रक्रिया भी प्रभावित होती है और स्थानीय स्तर पर विकास की गति धीमी पड़ती है।
समय पर होना चाहिए पंचायतों का गठन
सरकारों को यह समझना होगा कि पंचायत चुनाव कोई साधारण प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की प्रक्रिया है। राजनीतिक परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन ग्राम पंचायतों का लोकतांत्रिक गठन समय पर होना चाहिए। लोकतंत्र की असली शक्ति गांवों में बसती है और यदि गांवों की आवाज कमजोर होगी तो लोकतंत्र भी कमजोर पड़ेगा। इसलिए राजस्थान सरकार को पंचायत चुनाव शीघ्र करवाकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी चाहिए।


