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जलभराव से जूझता बीकानेर और नगर निगम की जिम्मेदारी

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। बीकानेर में नगर निगम होने का अर्थ केवल कर वसूली, सफाई व्यवस्था या निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। नगर निगम का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व शहर की आधारभूत सुविधाओं को इस स्तर तक विकसित करना है कि आम नागरिकों का जीवन सामान्य और सुगम बना रहे। विशेष रूप से बरसात के मौसम में यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। दुर्भाग्य से बीकानेर की स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है, जहां थोड़ी सी वर्षा भी शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल देती है।

किसी भी आधुनिक शहर की पहचान यह होती है कि बारिश का पानी सड़कों और गलियों में लंबे समय तक जमा न रहे। वर्षा रुकने के कुछ समय बाद ही सड़कें सामान्य रूप से उपयोग योग्य हो जाएं, आवागमन बाधित न हो और नागरिकों को कीचड़, गंदगी तथा बदबू का सामना न करना पड़े। देश के अनेक शहरों में प्रभावी जल निकासी व्यवस्था के कारण भारी वर्षा के बाद भी जनजीवन शीघ्र सामान्य हो जाता है। लेकिन बीकानेर में स्थिति यह है कि मामूली बारिश भी कई क्षेत्रों को जलमग्न कर देती है।

कीचड़, गंदगी और सड़ांध

शहर की अनेक सड़कें, मोहल्ले और गलियां वर्षा के समय छोटे-छोटे तालाबों का रूप ले लेती हैं। पानी भरने के कारण वाहन चालकों, पैदल यात्रियों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर घंटों तक आवागमन प्रभावित रहता है। बारिश के बाद जमा पानी जब धीरे-धीरे सूखता है तो पीछे कीचड़, गंदगी और सड़ांध छोड़ जाता है। इससे न केवल शहर की छवि खराब होती है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।

योजना और क्रियान्वयन की कमी

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पाया। नगर निगम और उसके तकनीकी अधिकारियों के पास योजनाओं, सर्वेक्षणों और नियमों की कोई कमी नहीं है। बैठकों में विकास की लंबी-लंबी बातें होती हैं, लेकिन धरातल पर परिणाम अपेक्षित नहीं दिखाई देते। यदि हर वर्ष एक जैसी समस्या सामने आती है तो यह केवल प्राकृतिक कारणों का परिणाम नहीं बल्कि योजना और क्रियान्वयन की कमी का भी संकेत है।

जल निकासी को प्राथमिकता

यह आवश्यक है कि नगर निगम शहर की संपूर्ण जल निकासी व्यवस्था का वैज्ञानिक अध्ययन कराए। जिन क्षेत्रों में बार-बार जलभराव होता है, वहां विशेष परियोजनाएं बनाकर नालों, ड्रेनेज लाइनों और वर्षा जल निकासी तंत्र को मजबूत किया जाए। नई सड़कों के निर्माण में भी जल निकासी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

ठोस और दीर्घकालिक समाधान किया जाए

बीकानेर के नागरिक केवल आश्वासनों के नहीं, परिणामों के हकदार हैं। नगर निगम की सफलता का आकलन फाइलों और प्रस्तुतियों से नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि बारिश के बाद शहर कितनी जल्दी सामान्य स्थिति में लौटता है। यदि हर बरसात के साथ जलभराव, कीचड़ और दुर्गंध ही शहर की पहचान बने रहें तो यह नगर प्रशासन की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अब समय आ गया है कि इस समस्या को मौसमी नहीं बल्कि स्थायी शहरी चुनौती मानकर उसका ठोस और दीर्घकालिक समाधान किया जाए।

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