MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 1974 में स्थापित सिंचित क्षेत्र विकास विभाग यानी कमांड एरिया डवलपमेंट (सीएडी) की महत्वाकांक्षी योजना आज अपने मूल उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकी है। 25 जुलाई 1974 को दो आईएएस अधिकारियों के नेतृत्व में गठित इस प्राधिकरण का उद्देश्य इंदिरा गांधी नहर परियोजना (राजस्थान कैनाल) के प्रथम और द्वितीय चरण क्षेत्रों का समेकित विकास करना था, लेकिन आईजीएनपी और उपनिवेशन के मध्य सीएडी विभाग लगभग निष्क्रिय हो चुका है।
सीएडी को किसानों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने से लेकर भूमि विकास, चकबंदी, खालों की लाइनिंग, भूमि समतलीकरण, मृदा परीक्षण, जल प्रबंधन, फसल पैटर्न निर्धारण और कृषि उत्पादों के विपणन तक की व्यापक जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसके अलावा पशुपालन विकास, वानिकी, बागवानी, चारागाह विकास, सड़कों का निर्माण, ग्रामीण आवास, टाउन प्लानिंग और स्थानीय बाजारों के विकास जैसे अनेक आयाम भी इसमें शामिल थे। सीएडी ने किसानों को समग्र सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंडी विकास समितियों का गठन कर जिले में आठ सुव्यवस्थित कृषि मंडियों की स्थापना की थी।
योजनाओं का क्रियान्वयन लगभग ठप
इन मंडियों में व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत भूखंडों के साथ पार्क, स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थल और परिवहन सुविधाओं के लिए विस्तृत योजनाएं तैयार की गई थीं। टाउन प्लानिंग विभाग ने इसके लिए ईयरमार्क नक्शे भी विकसित किए थे। मिली जानकारी के अनुसार बीते पांच दशकों से स्थापित इन योजनाओं का क्रियान्वयन लगभग ठप हो गया है। वर्तमान में इन मंडियों में न तो नियोजित ढांचा नजर आता है और न ही मूलभूत सुविधाएं विकसित हो पाई हैं। स्थिति यह है कि मंडी समितियों की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनें अब सीएडी के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर संबंधित उपखंड अधिकारियों को सौंप दी गई हैं, जिससे प्राधिकरण की मूल विकास अवधारणा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
कई स्थानों पर अनधिकृत कब्जे बढ़े
सूत्रों के अनुसार, जमीनों के हस्तांतरण के बाद कई स्थानों पर अनधिकृत कब्जे बढ़ गए हैं। न तो नियोजित प्लॉट विकसित हो पाए हैं और न ही औद्योगिक या संस्थागत इकाइयों की स्थापना हो सकी है। सार्वजनिक उपयोग के लिए प्रस्तावित स्थल,जैसे स्कूल, मंदिर, धर्मशालाएं और मंडी यार्ड भी कागजों तक सीमित रह गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीएडी की मूल योजनाओं को समय पर लागू किया जाता तो बीकानेर क्षेत्र में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का स्वरूप काफी अलग होता।
सीएडी को पुनः सशक्त बने
वर्तमान हालात को देखते हुए आवश्यक है कि सरकार इस प्राधिकरण की भूमिका की पुनर्समीक्षा कर ठोस कदम उठाए, ताकि सिंचित क्षेत्र विकास की मूल परिकल्पना को पुनर्जीवित किया जा सके। भारतीय किसान संघ सहित स्थानीय किसानों और जानकारों ने भी मांग की है कि सीएडी को पुनः सशक्त बनाकर उसकी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाए, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिल सके।
इनका कहना है
मंडी विकास समितियों के लिए आठ कस्बों में आरक्षित विशाल जमीनों का विकास किया जा कर किसानों के हितार्थ कदम उठाये जाने थे लेकिन स्थानीय जन प्रतिनिधियों को शिथिलता और किसानों की अज्ञानता के कारण इस तरफ किसी का ध्यान नहीं गया और ये शानदार मंडिया आज भी वीरान पड़ी हैं जबकि अनेक स्थानों पर निर्माण हो चुके हैं।
शंभू सिंह राठौड़
जिलाध्यक्ष
भारतीय किसान संघ।
इनका कहना है
मंडी विकास समितियों का कार्य सीएडी के पास नहीं है,राज्य सरकार के निर्देशानुसार इससे सम्बंधित समस्त रिकॉर्ड संबंधित उप खंड अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया गया है।
नवनीत कुमार
आयुक्त
सीएडी बीकानेर


