NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। भाजपा नेता और श्रीडूंगरगढ़ के विधायक डॉ. ताराचंद सारस्वत ने कहा कि पाश्चात्य दुष्प्रभावों से बचने के लिए हमें भारतीय संस्कृति एवं जीवन पद्धति की ओर लौटना होगा।
सारस्वत बुधवार को हिरोशिमा दिवस के अवसर पर डूंगर कॉलेज के प्रताप सभागार में प्राणिविज्ञान विभाग तथा इंडियन सोसाइटी फॉर रेडियो बायोलॉजी की ओर से “रेडिएशन एवं पर्यावरण” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं जीवन पद्धति एक व्यक्ति का संर्पूण विकास करती है।
श्रीअन्न व देशी खानपान बेहतर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन ने श्रीअन्न व देशी खानपान को अपनाकर बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने की बात कही। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. राजेंद्र कुमार पुरोहित ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए पर्यावरण के प्रति सजगता एवं रेडिएशन से बचाव की जागरूकता पर बल दिया।
रेडिएशन के प्रभाव से बचने की सलाह
प्राणिविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. लीना शरण ने विभागीय गतिविधियों एवं रेडिएशन विषय पर हो रहे कार्यों की जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीकानेर विभाग प्रचारक विनायक ने देशी खान-पान एवं आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से रेडिएशन के प्रभाव से बचने की सलाह दी। ड्यूश बैंक अमेरिका के निदेशक पंकज ओझा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित वैज्ञानिक सूत्रों को समझने की आवश्यकता बताई।
नवीन शोध का पेटेंट कराने का प्रोत्साहन
सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा बीकानेर संभाग डॉ. पुष्पेंद्र सिंह शेखावत ने शोधार्थियों को नवीन शोध का पेटेंट कराने के लिए प्रोत्साहित किया। कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नीति शर्मा, आयोजन सचिव डॉ. आनंद कुमार खत्री ने भी विचार रखे। आयोजन सचिव डॉ. अर्चना पुरोहित ने संगोष्ठी की संकल्पना प्रस्तुत की।
चार तकनीकी सत्रों का आयोजन
संगोष्ठी के अंतर्गत चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें प्रो. ममता शर्मा, डॉ. पंकज जोशी, डॉ. अथियमन एवं प्रो. अनिल छंगानी ने रेडिएशन एवं पर्यावरण पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। साथ ही देशभर से आए संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी का संचालन डॉ. सोनू शिवा एवं डॉ. शशिकांत आचार्य ने किया।


