DR. S.K. RAINA
बीकानेर, (samacharseva.in)। सरकारी अव्यवस्था ने ली दो मासूमों की जान, कोविड-19 अपनी भयावहता से पूरे विश्व को संत्रस्त तो कर ही रहा है,अपनी कुरूपता से मानवीय संवेदना और प्रशासन की ज़िम्मेदारियों को भी तार-तार कर रहा है।एक मित्र ने बताया कि जम्मू शहर में हाल ही में एक ऐसी घटना हुई जिस के बारे में सुनकर दिल दहल उठता है और कलेजा मुंह को आता है।
जम्मू निवासी एक बुज़ुर्ग सज्जन अपने बेटे और पत्नी के साथ दिल्ली गए हुए थे।तबियत खराब हुई।दिल्ली जैसे महानगर में एक अस्पताल से दूसरे में धक्के खाने को मजबूर हुए।फैसला किया कि वापस जम्मू लौट चलें।यहाँ चेक-अप के बाद मालूम पड़ा कि वे कॅरोना से संक्रमित हैं।इस बीच बुज़ुर्ग सज्जन दम तोड़ गए।बेटे और पत्नी को कोरंटीन में रखा गया।अब समस्या यह सामने आई कि इन बुज़ुर्गवार का दाहसंस्कार कैसे हो और कौन करे?
प्राण सुखाने वाली गर्मी और लॉक डोउन की सख्ती।प्रशासन को गुहार लगाई मगर कोई सुनवाई नहीं।तभी दो भतीजों ने चाचाजी की अर्थी को अकेले-दम कंधा देने का जोखिम उठाया।स्थानीय श्मशानघाट के आसपास रहने वालों ने यह कहकर वहां पर दाह संस्कार करने को मना कर दिया कि मृतक कोविड-संक्रमित है।44 डिग्री के आतप में पीपीई किट पहने चाचा की लाश को ढोते दोनों भतीजे स्थानीय प्रशासन के कठोर निर्देशानुसार घूमते-घामते तवी नदी के किनारे एक निर्जन स्थान पर पहुँचे।जैसे-तैसे लकड़ियों का प्रबंध किया,चिता तैयार की और चाचाजी को मुखाग्नि दी।हे भगवान!इस बीच भयंकर गर्मी के कारण दोनों भतीजे प्राण सुखाने वाले आतप को झेल न पाए।निर्जन में पीने को जल भी सुलभ नहीं था।चाचाजी की अर्थी को कंधा क्या दिया खुद अपनी जानें भी गंवा बैठे।
माना जा रहा है कि स्थानीय प्रशासन के निर्दयतापूर्ण और असहयोगात्मक व्यवहार की वजह से इन दो मासूम भतीजों/सज्जनों की जानें चली गईं।

DR.S.K.RAINA
(डॉ० शिबन कृष्ण रैणा)
पूर्व सदस्य,हिंदी सलाहकार समिति,विधि एवं न्याय मंत्रालय,भारत सरकार।
पूर्व अध्येता,भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान,राष्ट्रपति निवास,शिमला तथा पूर्व वरिष्ठ अध्येता (हिंदी) संस्कृति मंत्रालय,भारत सरकार।
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