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राजस्व प्रमाण पत्रों में खामियां: अपात्र उठा रहे लाभ, पात्र वंचित

MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। राजस्व विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले विभिन्न प्रमाणपत्रों में आ रही खामियों और कमियों के कारण सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में त्रुटियों के चलते जहां अपात्र लोग योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, वहीं कई पात्र लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जा रहे हैं।

बीकानेर जिले की लूणकरणसर तहसील के विभिन्न राजस्व ग्रामों में आय, जाति, भूमि, लघु एवं सीमांत किसान, जन्म, मृत्यु और मूल निवास जैसे प्रमाणपत्रों में पटवारी स्तर से लेकर तहसीलदार स्तर तक की प्रक्रिया में कई तरह की कमियां सामने आ रही हैं। इन कमियों के कारण बड़े पैमाने पर अव्यवस्था की स्थिति बनती जा रही है।

राज्य सरकार की योजनाओं का दुरुपयोग

सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल शर्मा ने एक जानकारी में बताया कि कई मामलों में ऐसे लोगों को भी लघु और सीमांत किसान होने के प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए हैं जिनके पास सौ बीघा से अधिक जमीन है। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर संबंधित लोगों ने पंचायत राज विभाग, कृषि विभाग सहित अन्य सरकारी योजनाओं के तहत लाखों रुपये तक के अनुदान प्राप्त कर लिए हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास सैकड़ों बीघा जमीन है, उन्हें लघु कृषक का प्रमाणपत्र जारी कर सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करना राज्य सरकार की योजनाओं का दुरुपयोग है। इससे वास्तविक रूप से जरूरतमंद किसानों और पात्र व्यक्तियों के साथ अन्याय हो रहा है। वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अंकित विश्नोई ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अपात्र लोगों को गलत तरीके से प्रमाणपत्र जारी कर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना बेहद गलत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजस्व विभाग द्वारा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्ती नहीं बरती गई तो योजनाओं का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा।

गलत तरीके से जारी किए गए प्रमाणपत्रों को निरस्त किया जाए

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों की जांच कर गलत तरीके से जारी किए गए प्रमाणपत्रों को निरस्त किया जाए और पात्र लोगों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व जवाबदेह बनाया जाए।

इनका कहना है

जब प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं तब सम्बंधित पटवारी,और अन्य सरकारी कार्मिकों की रिपोर्ट तथा प्रार्थी के शपथ पत्र को आधार माना जाता है।अगर प्रार्थी शपथ पत्र में कोई तथ्य गलत अंकित करता है तो यह उसकी व्यक्तिगत जवाबदेही है।ऐसे में गलत साक्ष्य पेश करने पर दो साल तक कि सजा का प्रावधान है।वैसे भी हमने संबंधित पटवारियों को कह दिया है कि आराम पत्रों की रिपोर्ट करते समय तथ्यों को ध्यान में रखें।

विनोद पूनिया

तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट लूणकरणसर

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