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पाकिस्ता‍न की हर हरकत पर थी बीएसफ की नजर-अजय लूथरा

बीकानेर, 31 मई। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) क्षेत्रीय मुख्यालय बीकानेर के उप महानिरीक्षक बीकानेर अजय लूथरा ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दू र के दौरान सीमा सुरक्षा बल की नजर पाकिस्तानन की हर हरकत पर थी। लूथरा शनिवार को बीएसएफ सेक्टिर मुख्यानलय बीकानेर में ‘ऑपरेशन सिंदूर में सीमा सुरक्षा बल द्वारा दिये गये योगदान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्हों ने बताया कि बीएसएफ के जवानों ने काउंटर पार्ट से मिली प्रत्येतक गोपनीय जानकारियां सेना तक पहुंचाकर पाकिस्तारन में बने अनेक आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में अहम भूमिका निभाई।

डीआईजी ने बताया कि ऑपरेशन सिन्दू र के दौरान पाकिस्ताेन की तरफ से बीएसएफ बीकानेर सेक्टार में ड्रोन अटैक की गतिविधियां उतनी अधिक नहीं हुई जितनी की सीमांत जिले जैसलमेर नोर्थ व जैसलमेर साउथ में हुई। उन्हों ने कहा कि बीकानेर सेक्टरर में जितनी भी ड्रोन अटैक की एक्टिविटी हुई उसको काउंटर किया गया। माकूल जवाब दिया गया। जो हम कर सकते थे हनमे किया और बाकी काम के लिये आर्मी व एयरफोर्स को सूचना दी। डीआईजी ने कहा कि बीएसएफ की परिचालन क्षमता, खुफिया समन्वय, और बल के जवानों के अदम्य साहस व मुस्तैषदी के कारण बीकानेर में कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। उन्होंहने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में बीएसएफ ने अपनी फोर्स को फ्रंट में सपोर्ट वैपन के साथ 81 मोर्टर व एमएमजी मोर्टोर के साथ डिप्लोफय किया था। सारा साजो सामान बोर्डर पर डिप्लोबय कर रखा था।

सारी खबरें जुटाने का प्रयास किया

उन्हों ने बताया कि काउंटर पार्ट में 7 से 11 मई के बीच जो भी गतिविधि हुई उसकी सारी खबरें जुटाने का प्रयास किया गया। उन प्राप्तप सूचनाओं को एयरफोर्स व सेना को दी गईं। डीआईजी लूथरा ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूंर में केवल पाकिस्तागन में बने आतंकी कैंपों को तबाह करना था। इसमें बीएसएफ ने अहम भूमिका अदा की। राजस्थासन में अंतरराष्ट्री य सीमा क्षेत्र होने के कारण थ्रेट अधिक थी। उन्होंकने बताया कि एलसी तथा इंटरनेशनल बोर्डर पर अलग अलग वातावरण होता है। इंटरनेशनल बोर्डर पर कोई हरकत होती है तो फुल स्केनल वार में कन्व र्ट हो सकती है। इसके लिये पूरी तरह से तैयार थे। अपनी डिफेंस को मजबूत कर लिया था। ये अलग वार थी इसमें काइनेटिक फोर्स का अधिक इस्तेसमाल हुआ था। उप महानिरीक्षक लूथरा ने 23 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए नृशंस आतंकवादी हमले को कायराना हरकत बताया।

सीमा पर संभावित खतरे का सटीक आकलन

उन्हों्ने कहा कि इसी हमले के जवाब में भारत सरकार द्वारा दिनांक 07/08 मई की मध्यरात्रि को ऑपरेशन सिंदूर” लॉन्च किया गया। डीआईजी ने बताया कि पहलगाम नरसंहार के पश्चात दलजीत सिंह चौधरी (आईपीएस) महानिदेशक सीमा सुरक्षा बल ने पश्चिमी सीमा पर संभावित खतरे का सटीक आकलन कर, बीएसएफ को पूरी तरह से तैयार रहने के लिए निर्देशित किया। उन्होंपने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान पाकिस्तान की ओर से राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जैसलमेर, बीकानेर, और श्रीगंगानगर में लगातार ड्रोन गतिविधियाँ की गई। हमारी एयरस्पेस की सुरक्षा को चुनौती देने के प्रयासों को सीमा सुरक्षा बल ने भारतीय सेना व एयर फोर्स के साथ मिलकर तत्परता से विफल किया। डीआईजी लूथरा ने बताया कि 1971 के युद्ध में भारतीय सेना के साथ मिलकर पाकिस्तान को पराजित करने में बीएसएफ की निर्णायक भूमिका रही है।

तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बीएसएफ को ‘प्रथम रक्षा पंक्ति की उपाधि दी थी। ऑपरेशन सिंदूर में बीएसएफ ने फिर से उसी सम्मान और गरिमा को प्राप्त किया। योजनाबद्ध युद्धाभ्यास और क्रियान्वयन से यह सिद्ध किया कि बीएसएफ राष्ट्र की प्रथम रक्षा पंक्ति है। हम हर चुनौती को दुश्मन की आंखों में झाकते हुये स्वीकार करते है और सीमाओं पर चौकस रहते हैं। यह हमारा पवित्र कर्तव्य है कि हम अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दें।

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