एमजीएसयू में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह, आईसीडब्ल्यूसी– 2024 संपन्न
NEERAJJOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) बीकानेर के पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह और आईसीडब्ल्यूसी– 2024 विभिन्न कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ। एमजीएसयू के पर्यावरण विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार छंगाणी ने बताया कि सप्ताह के तहत आयोजित रंगोली प्रतियोगिता में ज्योति जोशी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता के दूसरे व तीसरे नंबर पर क्रमश नीलम गहलोत व प्रकृति रही। सप्ताह के तहत आयोजित निबंध प्रतियोगिता में पूर्वी भोजक प्रथम, निधि शर्मा द्वितीय तथा मेनका ने तीसरा स्थान पाया। फोटोग्राफी में अमित कुमार ने पहला, नीलम गहलोत दूसरा व हिमांशु ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार पोस्टर प्रतियोगिता में पूर्वी भोजक ने प्रथम, निधि शर्मा ने द्वितीय तथा मेनका ने तीसरा स्थान पाया है।
प्रो. छंगाणी ने बताया कि वन्यजीव सप्ताह का आयोजन एमजीएसयू सहित राज ऋषि गवर्नमेंट ऑटोनॉमस कॉलेज अलवर, राजस्थान वेटरिनरी एंड एनिमल साइंस विश्वविद्यालय बीकानेर, स्टेट फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ डिपार्मेंट, गवर्नमेंट ऑफ राजस्थान व बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के संयुक्त तत्त्वाधान में एक से सात अक्टूबर तक किया गया। कार्यक्रम में ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड से 20 अतिथि व्याख्यानों व प्रशिक्षणों का आयोजन किया गया। वन्यजीव गणना, शोध के आयाम, वन्यजीव रेस्क्यू ट्रेनिंग भी दी गई।
उन्होंने बताया कि आयोजन में अमेरिका, तंजानिया, नाइजीरिया, नेपाल, बांग्लादेश, फिलिपिंस, पाकिस्तान, मलेशिया, जाम्बीया आदि देशों सहित कुल 1200 से ज्यादा प्रतिभागी बने।समापन समारोह के मुख्य अतिथि एमजीएसयू कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि युवा वर्ग को पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना चाहिए। समारोह में राजऋषि महाविद्यालय, अलवर द्वारा प्रकाशित व डॉ. ममता शर्मा द्वारा संपादित तीन पुस्तकों का अनावरण किया गया।
ये शिक्षाविद रहे मौजूद
समारोह में एमजीएसयू के पर्यावरण विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार छंगाणी राजूवास के शोध निर्देशक डॉ. सकर पालेचा राज ऋषि कॉलेज के मोहनीश मेहरा, डॉ. लीला कौर, प्रो. राजाराम चोयल, डॉ. मेघना शर्मा, डॉ. अनिल कुमार दुलार, डॉ. प्रभूदान चारण, डॉ. ज्योति लखानी, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. सोबती, डॉ. संतोष शेखावत, डॉ. मानकेश्व सैनी, डॉ. बिठ्ठल बिस्सा व डॉ. निर्मल भार्गव मौजूद रहे।


