MAHENDRA SIINGH SHEKHAWAT बीकानेर, (समाचार सेवा)। शहर के लोगों को जल्द ही प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलने वाला है। बीकानेर के निकट बीछवाल क्षेत्र से आगे करीब 50 हेक्टेयर में बन रहे मरूधर बायोलॉजिकल पार्क (जंतुआलय) का निर्माण कार्य इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रहा है। बीकानेर के वाइल्ड लाइफ प्रभारी और भारतीय वन सेवा के अधिकारी संदीप कुमार छलानी ने सोशल मीडिया चैनल समाचार सेवा से खास बातचीत में बताया कि इस बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण वर्ष 2017 से किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ लोगों को प्राकृतिक परिवेश में जानवरों को देखने का अवसर उपलब्ध कराना है। छलानी ने बताया कि पार्क को इस तरह से विकसित किया जा रहा है कि जानवरों को पिंजरे में कैद होने जैसा अनुभव न हो। विशेष रूप से मांसाहारी जीवों के लिए यहां जंगल जैसा प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। जो जानवर मांद या खोह में रहने के आदी होते हैं, उनके लिए उसी प्रकार की प्राकृतिक संरचनाएं बनाई जा रही हैं ताकि वे अपने स्वाभाविक व्यवहार के साथ रह सकें। उन्होंने बताया कि शाकाहारी जानवरों के लिए अलग से बड़े क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, क्योंकि ये जानवर समूह में रहने के आदी होते हैं।
वन्यजीवों की प्राकृतिक जीवन शैली जैसी होगी पार्क की संरचना
इस प्रकार पूरे पार्क की संरचना वन्यजीवों की प्राकृतिक जीवन शैली को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। डीएफओ छलानी ने कहा कि वन्यजीवों के साथ संवेदनशील व्यवहार बेहद आवश्यक है। उनका संरक्षण तभी संभव है जब उन्हें सुरक्षित और अनुकूल वातावरण दिया जाए। इसी उद्देश्य से इस बायोलॉजिकल पार्क को आधुनिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टियों से विकसित किया जा रहा है।
पुराने चिडि़या घर में चल रहा है रेस्क्यू सेंटर

बीकानेर के पुराने जंतुआलय को अब घायल और बीमार वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर के रूप में उपयोग किया जा रहा है।यहां पशुपालन विभाग और वेटेरिनरी विश्वविद्यालय के सहयोग से घायल, अस्वस्थ या भटके हुए जानवरों का उपचार किया जाता है। छलानी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि यदि कहीं भी कोई घायल, अस्वस्थ या भ्रमित वन्यजीव दिखाई दे तो उसे स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन विभाग कार्यालय, प्रशासन या रेस्क्यू सेंटर को दें, ताकि विशेषज्ञों की मदद से उस जानवर को सुरक्षित उपचार मिल सके। वन विभाग के इस प्रयास से बीकानेर क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलने के साथ-साथ लोगों को प्रकृति के करीब आने का भी अवसर मिलेगा।


