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गर्भ संस्कार एक में एक मां की भूमिका अहम – साध्वी लब्धी यशा

NEERAJ JOSHI बीकानेर, (समाचार सेवा)।तेरापंथ धर्म संघ की साध्वी लब्धीह यशा ने कहा कि गर्भ संस्कार एक शिशु का जीवन भर का व्यक्तित्व का निर्माण कर सकते हैं और इसमें एक मां की भूमिका अहम है क्योंकि वह जन्म देती है। साध्वीभ लब्धी यशा बुधवार को शांतिनिकेतन प्रांगण में तेरापंथ महिला मंडल गंगाशहर द्वारा मातृत्व एक वरदान रखना हर हाल में इसका ध्यान विषय पर आयोजित कार्यशाला में अपना प्रवचन कर रही थीं।

अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष पर मासिक कार्यशाला प्रेक्षा प्रवाह -शांति और शक्ति की ओर के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में साध्वी लब्धी यशा ने बताया कि सबसे पहले संस्कार गर्भ के अंदर होते हैं। गर्भ संस्कार एक शिशु का जीवन भर का व्यक्तित्व का निर्माण कर सकते हैं।

साध्वी विशदप्रज्ञा ने अपने प्रेरक पाथेय में इसे एक मां की अदृश्य पाठशाला बताते हुए कहा कि सिर्फ भावनाएं ही नहीं मां के भीतर की हर अनुभूति हर स्पर्श हर विचार शिशु के अंदर उतरता जाता है ये वो संगम है जहां श्रद्धा और विज्ञान एक मां के भीतर एक साथ पलते हैं। डॉक्टर दीप्ति वहल का संक्षिप्त परिचय दिया एवं डॉ दीप्ति ने गर्भावस्था के दौरान उचित रहन-सहन खान पान एवं इस दौरान रखी जाने वाली सावधानियों से बहुत ही सहज एवं सरल तरीके से अवगत करवाया। कार्यशाला का आयोजन साध्वी विशद प्रज्ञा एवं साध्वी लब्धी यशा के सानिध्य में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल अध्यक्ष संजू लालानी द्वारा मुख्य वक्ता डॉ. दीप्ति के स्वागत के साथ हुईं। साध्वी विधि प्रज्ञा जी द्वारा प्रेक्षा ध्यान का प्रायोगिक प्रशिक्षण करवाया गया। महिला मंडल पूर्व अध्यक्ष संतोष बोथरा ने भी विचार रखे। मंत्री मीनाक्षी आंचलिया ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन कोषाध्यक्ष अंजू ललवानी ने किया।